BiharCabinet – सम्राट चौधरी सरकार में नए और पुराने चेहरों को मिला मौका
BiharCabinet – बिहार की राजनीति में लंबे इंतजार के बाद सम्राट चौधरी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार गुरुवार को संपन्न हो गया। राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी देखने को मिली। मुख्यमंत्री बनने के करीब तीन सप्ताह बाद सम्राट चौधरी ने अपनी नई टीम को अंतिम रूप दिया। इस विस्तार में विभिन्न सहयोगी दलों के नेताओं को शामिल करते हुए राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की गई है।

कई दलों के नेताओं को मिला प्रतिनिधित्व
मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा और जेडीयू के अलावा सहयोगी दलों के नेताओं को भी जगह दी गई। जानकारी के अनुसार भाजपा से 15 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जबकि जेडीयू के 13 विधायक मंत्रिमंडल में शामिल किए गए। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) के दो और हम तथा आरएलएम के एक-एक नेता को भी जिम्मेदारी दी गई।
राजनीतिक जानकार इसे आगामी चुनावी समीकरणों और गठबंधन की मजबूती से जोड़कर देख रहे हैं। नए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी विशेष ध्यान रखा गया है।
जेडीयू के नए चेहरों पर खास नजर
इस बार जनता दल (यू) की ओर से कुछ नए चेहरों को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें निशांत कुमार, बुलो मंडल और श्वेता गुप्ता के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में रहे। खास तौर पर निशांत कुमार के शपथ लेने को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा रही, क्योंकि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के परिवार से जुड़े चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
जेडीयू की ओर से महिला प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया गया है। नई कैबिनेट में कुल पांच महिला मंत्री शामिल हैं, जिनमें तीन नेता जेडीयू से हैं। इसे महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
भाजपा ने भी दिए कई नए अवसर
भारतीय जनता पार्टी ने भी इस बार कुछ नए नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र पासवान, अरुण शंकर, नंदर किशोर राम और इंजीनियर शैलेंद्र जैसे नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पार्टी ने इस विस्तार के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को संदेश देने का प्रयास किया है। नए चेहरों को शामिल कर युवा और क्षेत्रीय नेतृत्व को भी आगे बढ़ाने की रणनीति दिखाई दे रही है।
विजय सिन्हा की भूमिका पर बनी हुई नजर
बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। संगठन और सरकार दोनों में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए माना जा रहा है कि उन्हें नई सरकार में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू करने वाले विजय सिन्हा लंबे समय से पार्टी के सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं।
विधायक, विधानसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता और उपमुख्यमंत्री जैसे पदों पर काम कर चुके विजय सिन्हा को पार्टी नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। राजनीतिक हलकों में उनकी प्रशासनिक पकड़ और आक्रामक शैली की चर्चा अक्सर होती रही है।
रत्नेश सदा फिर बने चर्चा का केंद्र
मंत्रिमंडल विस्तार में जनता दल (यू) के वरिष्ठ नेता रत्नेश सदा का नाम भी प्रमुख रूप से सामने आया। इससे पहले वर्ष 2023 में उन्हें अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। अब एक बार फिर उन्हें नई सरकार में शामिल किया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रत्नेश सदा की मौजूदगी सामाजिक समीकरणों को साधने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बिहार की राजनीति में दलित और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर हमेशा विशेष ध्यान दिया जाता रहा है और यह विस्तार भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।