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ForeignPolicy – कांग्रेस ने विदेश नीति और पाकिस्तान पर उठाए सवाल

ForeignPolicy – कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर सोमवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत के सामने नई कूटनीतिक चुनौतियां उभर रही हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि पाकिस्तान क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर अपनी मौजूदगी को पहले की तुलना में अधिक मजबूत करने का प्रयास कर रहा है, जिसे भारत के लिए गंभीर रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता पर जताई चिंता

जयराम रमेश ने कहा कि वर्ष 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए जो प्रयास किए थे, उनका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई दिया। हालांकि, उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पाकिस्तान फिर से कई वैश्विक और क्षेत्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाता नजर आ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान के बढ़ते रणनीतिक सहयोग का उल्लेख करते हुए इसे भारत के लिए महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक चुनौती बताया।

पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कोई सकारात्मक पहल हो रही है तो यह अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए अच्छा संकेत है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रस्तावित समझौते के सभी पहलू अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, इसलिए उसके प्रभाव का विस्तृत आकलन बाद में ही संभव होगा।

इस्राइल को लेकर संतुलित दृष्टिकोण की वकालत

जयराम रमेश ने भारत की विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भारत को विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों में संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर निर्णय लेते समय दीर्घकालिक रणनीतिक हितों और मानवीय दृष्टिकोण दोनों को महत्व दिया जाना चाहिए।

शहबाज शरीफ के दावे के बाद तेज हुई चर्चा

कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते का उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में प्रगति हुई है और इस पर औपचारिक प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है। इसी संदर्भ में भारत में भी पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

होर्मुज मार्ग खुलने से मिल सकती है राहत

जयराम रमेश ने कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पूरी तरह सामान्य रहती है तो भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिल सकती है। इसके बावजूद उन्होंने चेतावनी दी कि केवल एक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से घरेलू आर्थिक चुनौतियां समाप्त नहीं हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रही है और इन मुद्दों पर व्यापक नीति-आधारित समाधान की आवश्यकता है।

आर्थिक चुनौतियों का भी किया जिक्र

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि निजी निवेश की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है और कई आर्थिक संकेतक चिंता पैदा कर रहे हैं। उन्होंने रोजगार, मजदूरी वृद्धि और व्यापार से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि निवेश को प्रोत्साहित करने तथा आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उनके अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक कारकों पर भी गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है।

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