CriticalMinerals – भारत और अमेरिका अहम खनिज समझौते को अंतिम रूप देने के करीब
CriticalMinerals – भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में दोनों देश एक महत्वपूर्ण समझौते को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गए हैं, जो क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति और तकनीकी उद्योग से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को जानकारी दी कि यह समझौता अब अपने अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में इसे लेकर औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इससे उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा प्रणालियों और नई तकनीकों के विकास के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। उनके अनुसार दोनों देश इस दिशा में तेज गति से काम कर रहे हैं।
सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर जोर
सर्जियो गोर ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स आधुनिक तकनीकी उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र की आधारशिला बन चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा जैसी कई उभरती तकनीकों के लिए इन खनिजों की स्थिर आपूर्ति बेहद जरूरी है। इसी वजह से भारत और अमेरिका इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य इन संसाधनों की उपलब्धता को सुरक्षित करना और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक भरोसेमंद बनाना है। उनके अनुसार इससे दोनों देशों के उद्योगों को भविष्य की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। राजदूत ने उम्मीद जताई कि कुछ महीनों के भीतर इस समझौते को लेकर सकारात्मक घोषणा सामने आ सकती है।
राजनीतिक इच्छाशक्ति से बढ़ी साझेदारी की रफ्तार
कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिकी राजदूत ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के संबंधों में नई गति दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि पहले जिन क्षेत्रों में अड़चनें नजर आती थीं, अब वहां तेजी से प्रगति हो रही है। इसका कारण दोनों देशों के बीच मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और साझा रणनीतिक हित हैं।
गोर ने कहा कि वर्तमान समय में भारत-अमेरिका संबंध एक ऐसे मोड़ पर हैं जहां कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और यह साझेदारी आने वाले समय में और व्यापक रूप ले सकती है।
तीन प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ा सहयोग
राजदूत ने भारत और अमेरिका के रिश्तों में तीन प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके अनुसार पहला क्षेत्र व्यापार का है, जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र तकनीक और भरोसे से जुड़ा है, जिसमें नई तकनीकों के विकास और साझा अनुसंधान की संभावनाएं बढ़ी हैं।
तीसरा पहलू रणनीतिक समन्वय से जुड़ा है। गोर के मुताबिक दोनों देशों के बीच वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग मजबूत हुआ है। उनका मानना है कि इन तीनों क्षेत्रों में हुई प्रगति से यह स्पष्ट होता है कि भारत और अमेरिका के संबंध भविष्य में और अधिक गहराई प्राप्त कर सकते हैं।
अंतरिम व्यापार समझौते पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान अमेरिका और भारत के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया गया। सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से विकसित हो रही हैं और दोनों समाजों में प्रतिभा और उद्यमशीलता की मजबूत क्षमता मौजूद है। ऐसे में आर्थिक सहयोग के लिए अवसर भी काफी व्यापक हैं।
उन्होंने कहा कि इन संभावनाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए गति और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता थी, जो अब दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी, जिसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजदूत के अनुसार आने वाले समय में क्रिटिकल मिनरल्स समझौता और व्यापारिक सहयोग दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई दिशा दे सकते हैं। इससे तकनीकी विकास, औद्योगिक उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में दोनों देशों की भूमिका और मजबूत हो सकती है।