DevelopmentAgenda – नीति आयोग बैठक में झारखंड विकास मॉडल पर बढ़ा जोर
DevelopmentAgenda – नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि झारखंड की प्रगति केवल प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मानव संसाधन, शिक्षा, कौशल और नवाचार को भी विकास की मुख्यधारा में शामिल करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में केंद्र सरकार से सहयोग और समन्वय की अपेक्षा भी जताई।

बैठक में उन्होंने राज्य की विकास योजनाओं, चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा तथा झारखंड को औद्योगिक और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया।
खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड लंबे समय से खनिज संपदा के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब राज्य को मूल्य संवर्धन और विनिर्माण आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है। उनका मानना है कि राज्य के संसाधनों का अधिकतम लाभ स्थानीय स्तर पर उद्योगों और रोजगार के अवसरों के माध्यम से मिलना चाहिए।
उन्होंने खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ अनुसंधान, तकनीक और नवाचार केंद्रों के विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके लिए केंद्र सरकार से सहयोग की मांग की गई।
नए निवेश क्षेत्रों को बढ़ावा देने की वकालत
बैठक में टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और कृषि प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि खनन क्षेत्र में नई तकनीकों और आधुनिक प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि उत्पादन क्षमता और पर्यावरणीय संतुलन दोनों को बेहतर बनाया जा सके।
शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान
हेमंत सोरेन ने शिक्षा को राज्य के विकास का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि उत्कृष्ट विद्यालयों के विस्तार का कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रतिष्ठित संस्थानों में सफलता हासिल की है।
राज्य सरकार युवाओं को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों के लिए तैयार करने पर भी काम कर रही है। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि उन्हें बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप अवसर मिल सकें।
स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए कई पहल की गई हैं। राज्य में दवा दुकानों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
पोषण सुधार कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। आंगनबाड़ी ढांचे को मजबूत करने और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कृषि और खेल क्षेत्र की उपलब्धियां
बैठक में कृषि क्षेत्र में किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बागवानी और पोषण आधारित कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
खेल क्षेत्र में राज्य के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्होंने खेल अवसंरचना को और मजबूत बनाने की आवश्यकता जताई। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए भी झारखंड को अवसर देने की मांग की गई।
केंद्र के समक्ष रखीं प्रमुख मांगें
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी उठाए। इनमें जलापूर्ति परियोजनाओं के लिए लंबित वित्तीय सहायता, विभिन्न केंद्रीय उपक्रमों से जुड़े बकाया भुगतान, भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं में सरलीकरण और शिक्षा व स्वास्थ्य से संबंधित परियोजनाओं को मंजूरी देने जैसी मांगें शामिल रहीं।
उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय से विकास योजनाओं को और गति मिल सकती है तथा झारखंड को आर्थिक और सामाजिक प्रगति के नए चरण तक पहुंचाया जा सकता है।