MiddleEastTalks – इस्राइल-लेबनान के बीच 34 साल बाद उच्चस्तरीय वार्ता की तैयारी
MiddleEastTalks – पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच इस्राइल और लेबनान के रिश्तों में एक नई हलचल दिखाई दे रही है। लंबे समय से टकराव की स्थिति झेल रहे इन दोनों देशों के बीच अब उच्चस्तरीय बातचीत की संभावना ने कूटनीतिक हलकों में उम्मीद जगा दी है। इस्राइल की सुरक्षा कैबिनेट के एक वरिष्ठ सदस्य ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जल्द ही लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से सीधे संवाद कर सकते हैं। अगर यह वार्ता होती है, तो इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम माना जाएगा।

अमेरिका ने पहल को बताया ऐतिहासिक अवसर
इस संभावित बातचीत को लेकर अमेरिका ने भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक ऐतिहासिक पहल करार देते हुए कहा कि करीब 34 वर्षों के बाद इस्राइल और लेबनान के शीर्ष नेताओं के बीच सीधे संवाद की स्थिति बन रही है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा संदेश में कहा कि यह कोशिश दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के उद्देश्य से की जा रही है। वॉशिंगटन इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
सीमा पर तनाव और जमीनी हालात अब भी संवेदनशील
हालांकि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन जमीनी स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इस्राइली सेना और लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला के बीच समय-समय पर टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। संघर्ष को रोकने के लिए युद्धविराम लागू किया गया था, लेकिन सीमा क्षेत्रों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक किसी भी समझौते की राह आसान नहीं होगी।
त्रिपक्षीय बैठक से बनी बातचीत की जमीन
इससे पहले हाल ही में अमेरिका की मेजबानी में इस्राइल और लेबनान के बीच एक अहम त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी। यह पहल 1993 के बाद पहली बार इतने उच्च स्तर पर हुई, जिसने आगे की बातचीत के लिए आधार तैयार किया। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इस बैठक में प्रत्यक्ष संवाद शुरू करने, युद्धविराम को प्रभावी बनाने, सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और दीर्घकालिक शांति व्यवस्था की दिशा में काम करने पर सहमति बनी।
बैठक में अमेरिका, इस्राइल और लेबनान के कई वरिष्ठ राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा की। इस पहल को कूटनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका की मध्यस्थता और शांति प्रक्रिया की उम्मीद
अमेरिका ने साफ किया है कि इस पूरे संवाद को आगे बढ़ाने में उसकी भूमिका अहम बनी रहेगी। वॉशिंगटन का मानना है कि किसी भी स्थायी समाधान के लिए दोनों देशों के बीच समझौता उसकी मध्यस्थता में ही अंतिम रूप ले सकता है। साथ ही यह उम्मीद भी जताई गई है कि अगर बातचीत सफल होती है, तो इससे लेबनान में आर्थिक सुधार, पुनर्निर्माण और निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं।
इस्राइल और लेबनान के रुख में स्पष्ट अंतर
इस प्रक्रिया के दौरान दोनों देशों ने अपनी-अपनी प्राथमिकताएं भी सामने रखी हैं। इस्राइल ने स्पष्ट किया है कि वह लेबनान में सक्रिय गैर-राज्य सशस्त्र समूहों को निरस्त्र करने और सुरक्षा खतरे को खत्म करने को प्राथमिकता देता है। उसने दीर्घकालिक शांति और सीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लेबनान सरकार के साथ सहयोग की बात भी दोहराई है।
दूसरी ओर, लेबनान ने नवंबर 2024 में घोषित युद्धविराम को पूरी तरह लागू करने पर जोर दिया है। उसने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की मांग करते हुए मानवीय संकट को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता बताई है। दोनों देशों के बीच यही प्राथमिकताएं आगे की बातचीत की दिशा तय करेंगी।



