अंतर्राष्ट्रीय

IranUN – बेरूत हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र में ईरान का गंभीर आरोप

IranUN – ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि लेबनान की राजधानी बेरूत में चार वरिष्ठ ईरानी राजनयिकों की मौत एक लक्षित हमले का परिणाम है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर-सईद इरावानी ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को लिखे एक पत्र में इस घटना पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने की अपील की है।

ईरानी राजदूत के अनुसार 8 मार्च को बेरूत स्थित रामादा होटल पर एक लक्षित सैन्य हमला किया गया, जिसमें चार ईरानी राजनयिकों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी वहां अस्थायी रूप से ठहरे हुए थे और वे एक संप्रभु देश के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे थे। ईरान का दावा है कि इससे पहले इस्राइली सेना की ओर से सार्वजनिक रूप से ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई थी, जिसके कारण उन्हें सुरक्षा कारणों से होटल में रखा गया था।

राजनयिकों की हत्या को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

अमीर-सईद इरावानी ने अपने पत्र में कहा कि किसी दूसरे देश में कार्यरत आधिकारिक राजनयिकों को निशाना बनाना गंभीर अपराध है। उनका कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनयिक सुरक्षा से जुड़े नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इसे आतंकवादी प्रकृति की कार्रवाई बताते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

ईरानी प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि यह मामला संयुक्त राष्ट्र चार्टर और 1973 में पारित उस अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन है, जिसमें राजनयिकों और अन्य संरक्षित व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप

ईरान ने अमेरिका और इस्राइल पर नागरिकों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में अपने बयान में ईरानी राजदूत ने कहा कि हालिया हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए हैं। उनके मुताबिक अब तक 1,300 से अधिक नागरिकों की जान जा चुकी है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि हजारों नागरिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है। ईरान के अनुसार 7,943 आवासीय घर, 1,617 व्यावसायिक केंद्र, 32 चिकित्सा संस्थान, 65 स्कूल और रेड क्रॉस से जुड़े 13 भवन प्रभावित हुए हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि इस तरह के हमलों से मानवीय स्थिति और गंभीर हो गई है।

ईंधन भंडारण स्थलों पर हमले से पर्यावरणीय चिंता

ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया सैन्य कार्रवाई में ईंधन भंडारण स्थलों को भी निशाना बनाया गया। उनके अनुसार 7 मार्च की रात को किए गए हमलों में कई भंडारण स्थलों पर भारी विस्फोट हुए। इससे वातावरण में जहरीले रसायन फैल गए, जिससे आसपास के इलाकों में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया।

ईरानी प्रतिनिधि ने बताया कि अगले दिन हुई बारिश के कारण ये प्रदूषक और अधिक क्षेत्रों में फैल गए। इससे लोगों में सांस से जुड़ी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने की आशंका जताई गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल मानवीय बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। ईरानी राजदूत का कहना है कि यदि ऐसे हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान सुनिश्चित करें और हिंसा को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। ईरान ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में अन्य देशों के लिए भी इसी तरह की स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

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