GoldPolicy – मंदिरों के सोने को लेकर सरकार ने अफवाहों का किया खंडन
GoldPolicy – केंद्र सरकार ने मंदिरों में रखे सोने के मुद्रीकरण को लेकर चल रही चर्चाओं और दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि देश के किसी भी मंदिर, धार्मिक ट्रस्ट या आस्था स्थल के सोने को लेकर ऐसी कोई योजना सरकार के विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रसारित हो रही खबरों को भ्रामक और निराधार बताया है।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा गया कि मंदिरों के पास मौजूद सोने को किसी विशेष योजना के तहत शामिल करने की बातें पूरी तरह गलत हैं। मंत्रालय ने साफ किया कि सरकार ने न तो ऐसी किसी योजना का प्रस्ताव तैयार किया है और न ही इस दिशा में कोई प्रक्रिया शुरू की गई है।
मंदिरों की संरचनाओं को लेकर भी दावों का खंडन
हाल के दिनों में कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया जा रहा था कि मंदिरों के गुंबद, दरवाजों और अन्य हिस्सों पर लगी सोने की परतों को देश के रणनीतिक स्वर्ण भंडार का हिस्सा माना जा सकता है। वित्त मंत्रालय ने इन दावों को भी पूरी तरह असत्य बताया है।
मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की जानकारी का कोई आधिकारिक आधार नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों को लेकर किसी भी प्रकार की नीति परिवर्तन संबंधी खबर केवल आधिकारिक माध्यमों से ही साझा की जाएगी। ऐसे मामलों में अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा करने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
लोगों से अफवाहों से बचने की अपील
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली सूचनाओं को आगे साझा न करें। मंत्रालय ने कहा कि गलत जानकारी तेजी से फैलने पर समाज में अनावश्यक चिंता और भ्रम की स्थिति बन सकती है। खासकर धार्मिक विषयों से जुड़ी अफवाहें सामाजिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।
वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि नीति और सरकारी योजनाओं से संबंधित हर महत्वपूर्ण जानकारी अधिकृत प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी वेबसाइटों और सत्यापित सार्वजनिक मंचों के माध्यम से जारी की जाती है। इसलिए नागरिकों को केवल उन्हीं स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए।
संवेदनशील विषयों पर सावधानी की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों और उनकी संपत्तियों से जुड़े मुद्दे संवेदनशील होते हैं। ऐसे मामलों में अप्रमाणित खबरें लोगों के बीच गलतफहमी पैदा कर सकती हैं। यही वजह है कि सरकार ने समय रहते इन दावों का आधिकारिक रूप से खंडन करना जरूरी समझा।
वित्त मंत्रालय के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मंदिरों के सोने को लेकर फिलहाल किसी प्रकार की सरकारी मुद्रीकरण योजना नहीं बनाई जा रही है। सरकार ने दोहराया है कि किसी भी नीति से जुड़ी जानकारी केवल अधिकृत चैनलों के माध्यम से ही सार्वजनिक की जाएगी।
सोशल मीडिया पर बढ़ी थी चर्चा
बीते कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर कई तरह की चर्चाएं देखने को मिली थीं। कुछ पोस्ट में दावा किया गया था कि सरकार धार्मिक संस्थानों के सोने को आर्थिक उपयोग में लाने की योजना बना रही है। हालांकि अब मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद इन दावों को पूरी तरह निराधार माना जा रहा है।
सरकार ने लोगों से जिम्मेदारी के साथ जानकारी साझा करने और किसी भी खबर की पुष्टि किए बिना उसे आगे प्रसारित न करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सही जानकारी तक पहुंच बनाए रखना सार्वजनिक विश्वास के लिए जरूरी है।