IranDeal – अमेरिका-ईरान समझौते पर तेज हुईं राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
IranDeal – अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए 14 बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस समझौते के सार्वजनिक होने के बाद भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि दूसरी ओर विभिन्न देशों के प्रतिनिधि इस समझौते के संभावित प्रभावों का आकलन कर रहे हैं।

जयराम रमेश ने उठाए कूटनीतिक सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक सार्वजनिक बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभावों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान की बढ़ती क्षेत्रीय भूमिका और पश्चिम एशिया से जुड़े बदलते समीकरणों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर टिप्पणी की। रमेश का कहना है कि इस तरह के घटनाक्रम दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
समझौते को लेकर अगले दो महीने अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समझौते के वास्तविक प्रभाव का आकलन आने वाले हफ्तों में ही संभव होगा। दस्तावेज में शामिल प्रावधानों के क्रियान्वयन और दोनों देशों की प्रतिबद्धता पर काफी कुछ निर्भर करेगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि अगले 60 दिन इस प्रक्रिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इस्रायल ने अपनी चिंताएं दोहराईं
भारत में इस्रायल के उप-राजदूत फेरेस सेब ने समझौते को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके देश की सुरक्षा चिंताओं को किसी भी बातचीत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर इस्रायल की पुरानी चिंताओं का उल्लेख किया। साथ ही क्षेत्र में सक्रिय संगठनों को मिलने वाले समर्थन को भी सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।
लेबनान सीमा पर सुरक्षा को लेकर सतर्कता
इस्रायल ने लेबनान सीमा क्षेत्र की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि सुरक्षा चुनौतियां बनी रहती हैं तो आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे। हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर विभिन्न पक्षों की निगाहें इस समझौते के परिणामों पर टिकी हुई हैं।
ट्रंप और पेजेशकियन ने किए हस्ताक्षर
अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने समझौता ज्ञापन को औपचारिक मंजूरी दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह दस्तावेज दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। समझौते में समुद्री व्यापार मार्गों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों को भी महत्व दिया गया है।
अमेरिकी प्रशासन ने व्यवहार आधारित मूल्यांकन की बात कही
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भविष्य में ईरान का आकलन उसके वास्तविक कदमों और नीतियों के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल आश्वासनों पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक परिणामों पर ध्यान देगा। वेंस के अनुसार, आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि समझौते के प्रावधानों का पालन किस तरह किया जाता है।
क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि कई देशों और क्षेत्रीय पक्षों की अपनी-अपनी चिंताएं भी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में इस समझौते की प्रगति और इसके भू-राजनीतिक प्रभावों पर वैश्विक स्तर पर नजर बनी रहेगी।