AIChatbots – बच्चों की सुरक्षा के लिए अमेरिका में नया विधेयक, AI प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ेगी जवाबदेही
AIChatbots– किशोरों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट्स का बढ़ता उपयोग अब नीति निर्माताओं की चिंता का विषय बनता जा रहा है। मानसिक तनाव, अकेलेपन या भावनात्मक समस्याओं के दौरान कई युवा पारंपरिक सलाहकारों या परिवार के बजाय AI चैटबॉट्स से बातचीत करना पसंद कर रहे हैं। इसी बदलते डिजिटल परिदृश्य को देखते हुए अमेरिका में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य नाबालिगों के लिए AI सेवाओं को अधिक सुरक्षित बनाना और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी तय करना है।

क्या है नया प्रस्तावित कानून
अमेरिका के वर्मोंट राज्य से डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि बेका बालिंट ने “Addictive Design Act” नाम से यह विधेयक पेश किया है। प्रस्तावित कानून का मकसद ऐसे AI फीचर्स पर नियंत्रण लगाना है, जो बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक चैटबॉट्स से जुड़े रहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। विधेयक के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऐसे डिजाइन अपनाने से बचना होगा जो मानसिक रूप से संवेदनशील उपयोगकर्ताओं की निर्भरता बढ़ा सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
विधेयक पेश करने के पीछे मुख्य कारण किशोरों में AI चैटबॉट्स के बढ़ते इस्तेमाल को माना जा रहा है। कई युवा भावनात्मक सहयोग, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सवालों और व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, प्रस्ताव रखने वाले सांसद का कहना है कि मौजूदा AI सिस्टम ऐसे संवेदनशील मामलों को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं और गलत या असंतुलित सलाह का जोखिम बना रह सकता है।
किन फीचर्स पर लग सकती है रोक
प्रस्तावित कानून में उन सुविधाओं का उल्लेख किया गया है जिन्हें उपयोगकर्ताओं की डिजिटल निर्भरता बढ़ाने वाला माना गया है। इनमें लगातार बातचीत जारी रखने के लिए प्रेरित करने वाले टाइपिंग संकेत, इंसानों जैसे दिखने वाले डिजिटल अवतार, पुरानी बातचीत के आधार पर व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग, अतिरिक्त सुविधाओं के लिए बातचीत जारी रखने की शर्त और लंबे समय तक बिना किसी ब्रेक के चैट की अनुमति जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा AI सिस्टम द्वारा स्वयं को वास्तविक व्यक्ति जैसा प्रस्तुत करने वाले व्यवहार पर भी निगरानी की बात कही गई है।
शोध और निगरानी पर रहेगा विशेष जोर
विधेयक में युवाओं पर AI चैटबॉट्स के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों की भागीदारी वाली एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने की योजना है। साथ ही वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने और अभिभावकों तथा शिक्षकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने हेतु अलग से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव शामिल है।
डेटा साझा करने के नियम होंगे अधिक सख्त
प्रस्तावित कानून के तहत AI कंपनियों को आवश्यक शोध के लिए अधिकृत शोधकर्ताओं के साथ जरूरी डेटा साझा करना पड़ सकता है। यदि कोई कंपनी निर्धारित नियमों का पालन नहीं करती है, तो उस पर आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान भी रखा गया है। इसके अलावा आयु सत्यापन के दौरान उपयोगकर्ताओं से केवल सीमित जानकारी लेने और तय समय सीमा के भीतर उसे हटाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है, ताकि गोपनीयता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ सकती है वैश्विक बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो AI सेवाओं के संचालन और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े वैश्विक मानकों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। हाल के वर्षों में विभिन्न देशों में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हुई है। ऐसे में AI तकनीक के विस्तार के साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी को लेकर नए नियम बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।