Pharma Export – यूरोपीय संघ ने भारतीय API कंपनियों को दी निर्यात की नई मंजूरी
Pharma Export- भारतीय दवा उद्योग के लिए यूरोप से एक अहम सकारात्मक संकेत मिला है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कई भारतीय दवा निर्माताओं को यूरोपीय संघ (EU) में एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) के निर्यात के लिए आवश्यक लिखित स्वीकृति प्रदान की है। इस फैसले के बाद संबंधित कंपनियां यूरोपीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कैंसर, एंटीबायोटिक और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं में उपयोग होने वाले कच्चे पदार्थ की आपूर्ति कर सकेंगी।

गुणवत्ता मानकों का पालन रहेगा अनिवार्य
नियामक संस्था ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृति मिलने के बाद भी कंपनियों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों का लगातार पालन करना होगा। यदि किसी निरीक्षण के दौरान उत्पादन, गुणवत्ता या नियामकीय अनुपालन में कोई कमी सामने आती है, तो संबंधित कंपनी को सात दिनों के भीतर इसकी जानकारी देनी होगी। साथ ही, यदि देश या विदेश की किसी नियामक एजेंसी की जांच में अनियमितता पाई जाती है, तब भी इसकी सूचना देना आवश्यक रहेगा। नियमों का उल्लंघन होने पर निर्यात की मंजूरी तत्काल प्रभाव से निलंबित या रद्द की जा सकती है।
भारत और यूरोप दोनों को मिल सकता है लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, इस व्यवस्था से भारतीय दवा उद्योग की यूरोपीय बाजार तक पहुंच और मजबूत होगी। दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों पर शुल्क संबंधी रियायतों और नियामकीय प्रक्रियाओं में सरलता आने से भारतीय जेनेरिक दवाएं यूरोप में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी। इसके साथ ही प्रशासनिक खर्च घटने और मंजूरी की प्रक्रिया तेज होने से दवा कंपनियों को नए उत्पाद बाजार में लाने में भी सुविधा मिलेगी।
इन भारतीय कंपनियों को मिली स्वीकृति
यूरोपीय संघ में API निर्यात के लिए जिन भारतीय कंपनियों को अनुमति मिली है, उनमें तेलंगाना स्थित ऑनर लैब लिमिटेड, महाराष्ट्र की रवि बायोलाइफ प्राइवेट लिमिटेड और यूनीमैक्स केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों को अब यूरोपीय नियामकीय मानकों का पालन करते हुए वहां की दवा निर्माण कंपनियों को कच्चे पदार्थ की आपूर्ति करने का अवसर मिलेगा।
वैश्विक बाजार में बढ़ सकती है भारतीय दवा उद्योग की हिस्सेदारी
अमेरिका के साथ जारी टैरिफ संबंधी अनिश्चितताओं के बीच यूरोप की यह पहल भारतीय दवा उद्योग के लिए नए व्यावसायिक अवसर लेकर आई है। जानकारों का मानना है कि यदि कंपनियां गुणवत्ता और नियामकीय मानकों का लगातार पालन करती हैं, तो आने वाले समय में यूरोपीय बाजार में भारतीय API की मांग और बढ़ सकती है। इससे निर्यात में वृद्धि के साथ भारत की वैश्विक फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति भी और मजबूत होने की संभावना है।