स्वास्थ्य

Sarcopenia – तेजी से घटती मांसपेशियों को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

Sarcopenia – क्या आपको भी महसूस हो रहा है कि बिना किसी खास वजह के शरीर दुबला होता जा रहा है और ताकत पहले जैसी नहीं रही? अगर हां, तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। कई बार यह स्थिति सार्कोपेनिया नाम की समस्या का संकेत हो सकती है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं और उनकी ताकत भी घटती जाती है। यह समस्या आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी होती है, लेकिन आजकल यह कम उम्र में भी देखने को मिल रही है।

क्या है सार्कोपेनिया और क्यों बढ़ रही है चिंता

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सार्कोपेनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की मांसपेशियों का आकार और ताकत दोनों कम होने लगते हैं। उम्र बढ़ने के साथ यह प्रक्रिया स्वाभाविक मानी जाती है, लेकिन जब यह तेजी से होने लगे तो चिंता की बात होती है। शोध बताते हैं कि 60 वर्ष के बाद हर साल मांसपेशियों में 1 से 2 प्रतिशत तक कमी आ सकती है, हालांकि कुछ मामलों में यह प्रक्रिया 30 की उम्र के बाद ही शुरू हो जाती है।

सिर्फ दुबलापन नहीं, गंभीर संकेत भी

डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ शरीर के पतले दिखने तक सीमित नहीं रहती। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है, गिरने का खतरा बढ़ सकता है और हड्डियों के टूटने की आशंका भी अधिक हो जाती है। कई लोगों को चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है और रोजमर्रा के काम भी मुश्किल लगने लगते हैं।

किन लक्षणों पर रखना चाहिए ध्यान

इस समस्या की शुरुआत धीरे-धीरे होती है, इसलिए इसके शुरुआती संकेत अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। अगर हाथ-पैरों की मांसपेशियां कम होती दिखें, भारी सामान उठाने में कठिनाई होने लगे या कुर्सी से उठते समय सहारे की जरूरत महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। चलने की गति धीमी हो जाना और बार-बार संतुलन बिगड़ना भी इसके संकेत हो सकते हैं।

किन कारणों से बढ़ता है खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में हार्मोन का स्तर घटता है, जिससे मांसपेशियों पर असर पड़ता है। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी भी एक बड़ा कारण है। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत मांसपेशियों को कमजोर बना देती है। खान-पान में प्रोटीन की कमी, विटामिन की कमी और कुछ पुरानी बीमारियां जैसे डायबिटीज या किडनी संबंधी समस्याएं भी इस स्थिति को बढ़ा सकती हैं।

कैसे करें पहचान और कब लें सलाह

अगर शरीर दुबला है लेकिन ताकत सामान्य है, तो यह जरूरी नहीं कि यह सार्कोपेनिया हो। लेकिन जब कमजोरी और थकान लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। समय रहते जांच कराने से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

बचाव के लिए क्या करें

विशेषज्ञ मानते हैं कि पूरी तरह से इस समस्या से बचना आसान नहीं है, लेकिन इसके प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, खासकर वॉकिंग और हल्की एक्सरसाइज, मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं। इसके साथ ही आहार में प्रोटीन युक्त चीजें जैसे दाल, दूध, अंडा और मेवे शामिल करना जरूरी है। विटामिन डी और कैल्शियम भी हड्डियों और मांसपेशियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

सही समय पर जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव से इस समस्या के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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