MenstrualHealth – माहवारी से जुड़े मिथकों पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
MenstrualHealth – मासिक धर्म महिलाओं के जीवन की एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, लेकिन आज भी समाज के कई हिस्सों में इसे लेकर संकोच और गलत धारणाएं बनी हुई हैं। जागरूकता की कमी के कारण किशोरियों और महिलाओं को कई बार मानसिक दबाव, असुविधा और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी सोच को बदलने और स्वच्छ माहवारी प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ पीरियड्स से जुड़े मिथकों और वास्तविक तथ्यों के बारे में खुलकर चर्चा करने की सलाह देते हैं।

पीरियड्स के रंग को लेकर फैली हैं कई गलतफहमियां
अक्सर माना जाता है कि माहवारी के दौरान ब्लीडिंग केवल चमकदार लाल रंग की ही होनी चाहिए, जबकि डॉक्टरों के अनुसार ऐसा जरूरी नहीं है। पीरियड्स का रंग हल्के गुलाबी से लेकर गहरे भूरे तक हो सकता है। यह बदलाव शरीर में हार्मोन स्तर, ब्लड फ्लो और मासिक चक्र के अलग-अलग दिनों के कारण होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लंबे समय तक असामान्य रंग, तेज गंध या अत्यधिक दर्द जैसी समस्या बनी रहे तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है। सामान्य परिस्थितियों में रंग में हल्का बदलाव चिंता का कारण नहीं माना जाता।
माहवारी में साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी
समाज में लंबे समय से यह धारणा चली आ रही है कि पीरियड्स के दौरान बाल धोना या नहाना नहीं चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस मान्यता को पूरी तरह गलत बताते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक माहवारी के समय शरीर की साफ-सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचाव के लिए महत्वपूर्ण होता है। नियमित स्नान और स्वच्छता अपनाने से शरीर तरोताजा महसूस करता है और कई महिलाओं को पेट दर्द व ऐंठन में भी राहत मिल सकती है। खासतौर पर गर्म पानी से नहाना शरीर को आराम देने में सहायक माना जाता है।
PMS को हल्के में लेना सही नहीं
कई लोग प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी PMS को सिर्फ मानसिक वहम मानते हैं, जबकि चिकित्सा विज्ञान इसे वास्तविक स्थिति मानता है। पीरियड्स शुरू होने से पहले महिलाओं को मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, थकान, सिरदर्द और पेट में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों का असर होता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
खानपान और दैनिक कामों पर रोक का नहीं है वैज्ञानिक आधार
माहवारी के दौरान अचार या खट्टी चीजों को छूने से उनके खराब होने जैसी बातें लंबे समय से सुनने को मिलती रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन धारणाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। पीरियड्स के दौरान महिलाएं सामान्य रूप से अपनी दिनचर्या जारी रख सकती हैं। संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और आराम शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। जागरूकता बढ़ने के साथ अब कई महिलाएं इन पुरानी मान्यताओं से बाहर निकलकर खुलकर अपनी सेहत पर ध्यान दे रही हैं।
जागरूकता बढ़ाने पर दिया जा रहा जोर
स्वास्थ्य संगठनों का मानना है कि मासिक धर्म को लेकर खुलकर बातचीत होना जरूरी है ताकि किशोरियों और महिलाओं को सही जानकारी मिल सके। स्कूलों और सामाजिक अभियानों के माध्यम से मेंस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिशें भी लगातार की जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही जानकारी और स्वच्छता अपनाने से महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।