स्वास्थ्य

Hepatitis – बारिश और जलभराव के बीच लिवर संक्रमण को लेकर बढ़ी स्वास्थ्य चिंता

Hepatitis– लगातार हो रही बारिश और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मानसून के दौरान दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई जैसे लिवर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। जहां सीवर का पानी पेयजल स्रोतों में मिल जाता है, वहां संक्रमण फैलने की आशंका और अधिक रहती है। ऐसे में व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षित खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

दूषित पानी से बढ़ सकता है संक्रमण

चिकित्सकों के अनुसार, हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई मुख्य रूप से संक्रमित भोजन और दूषित पानी के माध्यम से फैलने वाले वायरल संक्रमण हैं। बारिश के मौसम में सीवर ओवरफ्लो होने या जलभराव के कारण पेयजल प्रभावित हो सकता है, जिससे वायरस के फैलने का जोखिम बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी खराब स्वच्छता और असुरक्षित जल स्रोतों को इन संक्रमणों के प्रमुख कारणों में शामिल करता है।

लिवर पर पड़ सकता है गंभीर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों संक्रमण सीधे लिवर को प्रभावित करते हैं। शुरुआती अवस्था में बुखार, कमजोरी, मतली, उल्टी, पेट दर्द और भूख कम लगने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। संक्रमण बढ़ने पर आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब और गंभीर मामलों में लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा भी रहता है। समय पर जांच और उपचार से जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई में क्या अंतर

हेपेटाइटिस-ए का संक्रमण आमतौर पर दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है तथा इसके बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। वहीं हेपेटाइटिस-ई भी मुख्य रूप से इसी तरह फैलता है, लेकिन कुछ मामलों में अधपका मांस भी संक्रमण का कारण बन सकता है। डॉक्टरों के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए हेपेटाइटिस-ई अधिक गंभीर साबित हो सकता है, इसलिए इस वर्ग को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

मानसून में अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बारिश के मौसम में केवल उबला हुआ या अच्छी तरह फिल्टर किया गया पानी ही पीना चाहिए। भोजन हमेशा ताजा और पूरी तरह पका हुआ होना चाहिए। खुले में बिकने वाले कटे फल, चाट या अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इनके दूषित होने की संभावना अधिक रहती है। यदि किसी क्षेत्र में जलभराव है, तो वहां के पानी के संपर्क में आने के बाद हाथ और पैर अच्छी तरह साफ करना भी जरूरी है।

स्वच्छता और जागरूकता से कम हो सकता है जोखिम

डॉक्टरों का कहना है कि हाथों की नियमित सफाई संक्रमण रोकने के सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। खाना बनाने और खाने से पहले तथा शौचालय के उपयोग के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए। यदि लगातार बुखार, पीलिया, पेट दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहेगा। समय पर उपचार और सावधानी बरतकर मानसून के दौरान होने वाले लिवर संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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