Asthma – मौसम बदलते ही अस्थमा मरीजों के लिए बढ़ सकती हैं सांस संबंधी परेशानियां
Asthma- मौसम में बदलाव, खासकर बारिश और ठंड के दौरान, अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होती है। इस समय हवा में नमी बढ़ने, धूल, फफूंद, परागकण और प्रदूषण जैसे कारकों के कारण सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाई जाएं, तो अस्थमा अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इनहेलर हमेशा रखें साथ
अस्थमा के उपचार में डॉक्टर द्वारा निर्धारित इनहेलर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अचानक सांस फूलने या घरघराहट जैसी स्थिति में रेस्क्यू इनहेलर तुरंत राहत देने में मदद कर सकता है, जबकि कंट्रोलर इनहेलर लंबे समय तक बीमारी को नियंत्रित रखने के लिए उपयोग किया जाता है। घर से बाहर निकलते समय इनहेलर अपने साथ रखें और उसकी वैधता अवधि की समय-समय पर जांच करते रहें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा या इनहेलर बंद करना उचित नहीं माना जाता।
धूल और प्रदूषण से दूरी बनाएं
धूल, धुआं, वाहन प्रदूषण, सिगरेट का धुआं, तेज सुगंध वाले उत्पाद और रासायनिक गंध अस्थमा के सामान्य ट्रिगर माने जाते हैं। इनके संपर्क में आने पर श्वसन नलियों में सूजन बढ़ सकती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता का मास्क पहनना और अत्यधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचना फायदेमंद हो सकता है। घर के भीतर धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित रखना भी जरूरी है।
नमी और फफूंद पर रखें नजर
मानसून के दौरान घरों में नमी बढ़ने से दीवारों, बाथरूम, रसोई और खिड़कियों के आसपास फफूंद विकसित होने की संभावना रहती है। इनके सूक्ष्म कण हवा के साथ शरीर में पहुंचकर अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इसलिए घर में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें, नमी वाली जगहों की नियमित सफाई करें और आवश्यकता होने पर एग्जॉस्ट फैन या डीह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
घर की साफ-सफाई भी है जरूरी
धूल से भरे पर्दे, कालीन, गद्दे, तकिए और बेडशीट में डस्ट माइट्स जमा हो सकते हैं, जो एलर्जी और अस्थमा की समस्या बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञ नियमित सफाई, वैक्यूम क्लीनर के उपयोग और बिस्तर की चादरों तथा तकियों के कवर को समय-समय पर गर्म पानी से धोने की सलाह देते हैं। स्वच्छ और हवादार वातावरण श्वसन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
संतुलित आहार से मिल सकती है मदद
स्वस्थ भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है। विटामिन C, विटामिन D, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माने जाते हैं। दैनिक भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, मेवे और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करना लाभदायक हो सकता है। अत्यधिक तला-भुना और अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।
संक्रमण से बचाव पर दें विशेष ध्यान
सर्दी, जुकाम, फ्लू और अन्य श्वसन संक्रमण अस्थमा के मरीजों की स्थिति को गंभीर बना सकते हैं। नियमित रूप से हाथ धोना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना और बीमार लोगों से दूरी बनाए रखना संक्रमण के जोखिम को कम कर सकता है। यदि चिकित्सक सलाह दें तो आवश्यक टीकाकरण समय पर करवाना चाहिए। सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
नोट: यह जानकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दी गई सामान्य सलाह और उपलब्ध मेडिकल जानकारी पर आधारित है। किसी भी दवा, उपचार या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।