स्वास्थ्य

Fiber Intake – बदलती डाइट के साथ स्वास्थ्य के साथ हो रहा है बड़ा खिलवाड़, ऐसे करें बचाव…

Fiber Intake – बेहतर सेहत के लिए खान-पान में सुधार को लेकर विशेषज्ञ लगातार जोर देते रहे हैं। कई मेडिकल स्टडीज में यह बात सामने आई है कि अगर रोजमर्रा की डाइट संतुलित हो तो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बावजूद इसके, तेजी से बदलती जीवनशैली में लोगों की थाली से जरूरी पोषक तत्व धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं, जिनमें फाइबर की कमी एक बड़ी चिंता बनकर उभर रही है।

फाइबर क्यों है शरीर के लिए जरूरी

हेल्दी डाइट की बात होते ही अक्सर ध्यान प्रोटीन पर जाता है, लेकिन फाइबर भी उतना ही अहम तत्व है। यह पाचन तंत्र को सही बनाए रखने के साथ-साथ शरीर को अंदर से साफ रखने का काम करता है। विशेषज्ञ इसे शरीर का प्राकृतिक क्लीनिंग सिस्टम भी मानते हैं। पर्याप्त मात्रा में फाइबर लेने से न सिर्फ पाचन बेहतर रहता है, बल्कि दिल की सेहत, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है।

विशेषज्ञों की नजर में बदलती खानपान की आदतें

पुणे की डायटीशियन श्वेता गर्ग के अनुसार, फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और बीज फाइबर के प्रमुख स्रोत हैं। लेकिन मौजूदा समय में लोगों का झुकाव तेजी से जंक और प्रोसेस्ड फूड की ओर बढ़ा है, जिससे शरीर में फाइबर की कमी होने लगी है। यह बदलाव धीरे-धीरे स्वास्थ्य पर असर डालता है और कई समस्याओं की वजह बन सकता है। अच्छी बात यह है कि थोड़े से बदलाव से इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है।

रोजाना कितनी मात्रा में चाहिए फाइबर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 25 से 35 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है। यह मात्रा सामान्य खानपान से ही पूरी की जा सकती है, बशर्ते डाइट में संतुलन रखा जाए। अगर रोजाना के भोजन में फास्ट फूड, रिफाइंड और पैकेज्ड चीजें ज्यादा शामिल हैं, तो इससे फाइबर की कमी होना तय है। ऐसे में छोटी-छोटी आदतों में बदलाव जरूरी हो जाता है।

फाइबर की कमी के संकेत क्या हैं

शरीर में फाइबर की कमी कई तरह के संकेतों के जरिए सामने आती है। सबसे आम समस्या कब्ज की होती है, जिसमें मल सख्त हो जाता है और शौच में दिक्कत होती है। इसके अलावा पेट फूलना, गैस, एसिडिटी और भारीपन महसूस होना भी संकेत हो सकते हैं। फाइबर की कमी से ब्लड शुगर तेजी से बढ़-घट सकता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी प्रभावित होता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे इम्युनिटी पर भी असर पड़ता है।

कैसे सुधारें अपनी डाइट

फाइबर की कमी को दूर करने के लिए महंगे सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा के खाने में बदलाव काफी होता है। साबुत अनाज जैसे ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और जौ को डाइट में शामिल करना फायदेमंद है। फल और सब्जियां फाइबर का सबसे आसान और सस्ता स्रोत हैं, जैसे सेब, नाशपाती, अमरूद और पपीता। हरी पत्तेदार सब्जियां और दालें भी इसमें मदद करती हैं। फलों का जूस पीने के बजाय उन्हें साबुत खाना ज्यादा लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा, पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है ताकि फाइबर शरीर में सही तरीके से काम कर सके।

छोटे बदलाव से बड़ा फायदा

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर रोजाना की डाइट में संतुलन रखा जाए और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाए तो कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। प्रोसेस्ड फूड की मात्रा कम करना और घर के बने भोजन को अपनाना इस दिशा में अहम कदम हो सकता है। नियमित रूप से फाइबर युक्त भोजन लेने से न केवल पाचन बेहतर रहता है बल्कि लंबे समय में शरीर भी स्वस्थ बना रहता है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.