Epilepsy Study – योग से मिर्गी मरीजों में दिखे मानसिक और सामाजिक सुधार के संकेत
Epilepsy Study – मिर्गी से जूझ रहे लोगों के लिए एक नया शोध उम्मीद जगाने वाला माना जा रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि नियमित योगाभ्यास मिर्गी के मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। शोध में शामिल कई मरीजों ने योग के अभ्यास के बाद खुद को पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वासी और मानसिक रूप से बेहतर महसूस करने की बात कही।

अध्ययन में कैसे की गई जांच
यह अध्ययन रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के रूप में किया गया, जिसमें वयस्क मिर्गी रोगियों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को दो अलग-अलग समूहों में विभाजित किया। एक समूह को निर्धारित समय तक नियमित योग प्रशिक्षण दिया गया, जबकि दूसरे समूह को सामान्य चिकित्सकीय देखभाल मिलती रही। अध्ययन के दौरान मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक व्यवहार और बीमारी से जुड़े कलंक की भावना का मूल्यांकन किया गया।
योग करने वाले मरीजों में दिखे सकारात्मक बदलाव
अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, योग करने वाले प्रतिभागियों में बीमारी को लेकर शर्म या हीन भावना में कमी दर्ज की गई। साथ ही सामाजिक अस्वीकार्यता का डर भी कम हुआ। शोधकर्ताओं ने पाया कि योग से तनाव और चिंता के स्तर में सुधार हुआ, जिससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर हुई। कई प्रतिभागियों ने सामाजिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी महसूस की।
विशेषज्ञों ने नियमित अभ्यास पर दिया जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि योग और ध्यान जैसी गतिविधियां मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मिर्गी के उपचार में डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं को जारी रखना बेहद जरूरी है। योग को केवल सहायक उपाय के रूप में अपनाया जाना चाहिए, न कि इलाज के विकल्प के रूप में।
मरीजों के लिए उपयोगी सुझाव
मिर्गी से पीड़ित लोगों को नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है ताकि तनाव कम किया जा सके। इसके साथ ही दवाएं समय पर लेना, पर्याप्त नींद सुनिश्चित करना और शराब व तंबाकू से दूरी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की कमी कई मामलों में दौरे का जोखिम बढ़ा सकती है।
समाज में अब भी मौजूद हैं कई गलत धारणाएं
एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राजेश सागर ने बताया कि भारत में बड़ी संख्या में लोग मिर्गी से प्रभावित हैं, लेकिन बीमारी को लेकर आज भी कई मिथक और भ्रांतियां समाज में बनी हुई हैं। कई बार परिवार सामाजिक कारणों से मरीज की बीमारी को छिपाने की कोशिश करते हैं या उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखते हैं। ऐसी परिस्थितियां मरीजों में अकेलेपन और अवसाद की भावना को बढ़ा सकती हैं।
चिकित्सा के साथ योग का संयोजन हो सकता है लाभकारी
डॉ. सागर के अनुसार, शोध से संकेत मिलता है कि यदि नियमित योगाभ्यास को चिकित्सकीय उपचार के साथ जोड़ा जाए तो मरीजों को मानसिक और सामाजिक स्तर पर अतिरिक्त लाभ मिल सकते हैं। इससे वे दैनिक जीवन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकते हैं और सामान्य जीवनशैली अपनाने में अधिक सक्षम हो सकते हैं।