स्वास्थ्य

Diabetes – नई स्टडी में युवतियों में टाइप-2 डायबिटीज बढ़ने पर जताई गई चिंता

Diabetes – हाल ही में प्रकाशित एक शोध ने कम उम्र की महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार, पिछले एक दशक के दौरान 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में इस बीमारी के नए मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली इस बदलाव के प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते रोकथाम पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

अध्ययन में सामने आए महत्वपूर्ण आंकड़े

यह शोध मेडिकल जर्नल The Lancet Regional Health में प्रकाशित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड में वर्ष 2011 से 2024 के बीच 20 से 29 वर्ष की महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज के नए मामलों में करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी अवधि में समान आयु वर्ग के पुरुषों में भी वृद्धि देखी गई, लेकिन इसकी रफ्तार महिलाओं की तुलना में कम रही। दूसरी ओर, 60 से 79 वर्ष के लोगों में नए मामलों में कुछ कमी दर्ज की गई, हालांकि कुल मरीजों की संख्या अब भी इसी आयु वर्ग में सबसे अधिक है।

मोटापा बढ़ा रहा है बीमारी का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में बढ़ता बॉडी मास इंडेक्स (BMI) इस समस्या का प्रमुख कारण बनकर उभरा है। अध्ययन में पाया गया कि 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं का औसत वजन और कमर का आकार पिछले वर्षों की तुलना में तेजी से बढ़ा है। शोध में शामिल 20 से 29 वर्ष की कई महिलाओं का औसत BMI गंभीर मोटापे की श्रेणी तक पहुंच चुका था, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।

कम उम्र में डायबिटीज अधिक गंभीर मानी जाती है

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि टाइप-2 डायबिटीज कम उम्र में विकसित होती है तो इसका प्रभाव लंबे समय तक शरीर पर पड़ सकता है। इससे भविष्य में हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी संबंधी समस्याएं, आंखों की रोशनी प्रभावित होना और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान और जीवनशैली में सुधार को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

शोधकर्ताओं ने रोकथाम पर दिया जोर

इंपीरियल कॉलेज लंदन से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि मोटापे की रोकथाम के लिए वर्तमान प्रयासों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है, खासकर युवाओं के बीच। उनका सुझाव है कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रम युवाओं तक बेहतर तरीके से पहुंचने चाहिए, ताकि बीमारी के बढ़ते खतरे को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

विशेषज्ञों की क्या है सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए केवल उपचार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नियमित स्वास्थ्य जांच, वजन पर नियंत्रण, पौष्टिक भोजन और सक्रिय जीवनशैली अपनाना सबसे प्रभावी उपायों में शामिल है। यदि किसी व्यक्ति में बार-बार प्यास लगना, अत्यधिक थकान, बार-बार पेशाब आना या बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच और सही देखभाल से बीमारी के गंभीर प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.