DirectTax – नए टैक्स सिस्टम और बढ़ते करदाताओं ने बदली प्रत्यक्ष कर व्यवस्था
DirectTax- देश में नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल 2026 से प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में कई अहम बदलाव लागू किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन यह है कि अब कर प्रणाली में Financial Year (FY) और Assessment Year (AY) की अलग-अलग अवधारणा समाप्त कर एकीकृत Tax Year लागू किया गया है। सरकार का उद्देश्य करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, स्पष्ट और पारदर्शी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से टैक्स अनुपालन को बढ़ावा मिलने के साथ करदाताओं के बीच भ्रम भी कम होगा।

प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार दर्ज हुई बढ़ोतरी
जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में देश का कुल Direct Tax Collection बढ़कर 22.3 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इसमें लगभग 12 प्रतिशत की Compound Annual Growth Rate (CAGR) दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि इस अवधि में Personal Income Tax की वृद्धि Corporate Tax की तुलना में अधिक रही। जहां व्यक्तिगत आयकर में लगभग 17 प्रतिशत की CAGR रही, वहीं Corporate Tax में यह वृद्धि करीब 9 प्रतिशत रही। विशेषज्ञ इसे कर प्रणाली में सुधार और बेहतर अनुपालन का परिणाम मानते हैं।
करदाताओं की संख्या में आया उल्लेखनीय इजाफा
रिपोर्ट के मुताबिक बीते एक दशक में देश में Income Tax Return दाखिल करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2014 में जहां लगभग 3.05 करोड़ लोगों ने रिटर्न दाखिल किया था, वहीं वित्त वर्ष 2023 तक यह संख्या बढ़कर करीब 6.97 करोड़ हो गई। यह बढ़ोतरी न केवल डिजिटल टैक्स व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों का असर दिखाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि पहले अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग धीरे-धीरे औपचारिक कर व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।
टीडीएस व्यवस्था ने भी बढ़ाया कर दायरा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करदाताओं की वास्तविक संख्या केवल रिटर्न दाखिल करने वालों तक सीमित नहीं है। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनकी आय पर Tax Deducted at Source (TDS) के माध्यम से कर काटा जाता है, भले ही उन्होंने रिटर्न दाखिल न किया हो। ऐसे करदाताओं को शामिल करने पर कुल संख्या वित्त वर्ष 2014 के 5.38 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में करीब 9.92 करोड़ तक पहुंच गई। इससे यह संकेत मिलता है कि आय की निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है और कर चोरी की संभावनाएं सीमित हुई हैं।
व्यक्तिगत आयकर का बढ़ा योगदान
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2021 के बाद पहली बार Personal Tax Collection, Corporate Tax Collection से आगे निकल गया। वित्त वर्ष 2014 से 2024 के बीच Direct Tax Collection की संरचना में भी बदलाव देखने को मिला। कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह में व्यक्तिगत आयकर का हिस्सा बढ़कर 53.4 प्रतिशत हो गया, जबकि Corporate Tax का योगदान घटकर 46.6 प्रतिशत रह गया। इससे स्पष्ट होता है कि कर आधार का विस्तार मुख्य रूप से व्यक्तिगत करदाताओं के बढ़ने से हुआ है।
डिजिटल व्यवस्था से मजबूत हुई कर वसूली
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार द्वारा डिजिटल निगरानी और तकनीकी सुधारों पर लगातार जोर देने का असर कर संग्रह में साफ दिखाई दे रहा है। इस दौरान TDS Collection लगभग 2.5 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 6.5 ट्रिलियन रुपये और Advance Tax Collection करीब 2.9 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 12.8 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया। वर्ष 2017 में GST लागू होने के बाद Invoice Matching और Data Integration जैसी व्यवस्थाओं ने आय के सत्यापन को अधिक प्रभावी बनाया है, जिससे कर अनुपालन मजबूत हुआ है।
टैक्स आधार बढ़ाने की चुनौती अब भी कायम
जेएम फाइनेंशियल के विशेषज्ञ वेंकटेश बालासुब्रमण्यम के अनुसार भारत का Direct Tax-to-GDP Ratio बढ़कर लगभग 6.6 से 6.7 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे कुछ क्षेत्रीय देशों से बेहतर है, लेकिन विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अभी भी कम माना जाता है। वहीं कर विशेषज्ञ एस. हरि पंत का कहना है कि देश की कुल आबादी का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा ही Income Tax देता है। दूसरी ओर, कर विशेषज्ञ मनीष गाड़िया का मानना है कि 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कर छूट, कृषि आय पर करमुक्त व्यवस्था और Startup क्षेत्र को दी गई रियायतों के कारण बड़ी आबादी अभी भी आयकर के दायरे से बाहर है। ऐसे में आने वाले वर्षों में करदाता आधार का विस्तार नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना रहेगा।