AdaniAviation – नई एयरलाइन पर विचार से बदल सकती है भारतीय विमानन प्रतिस्पर्धा
AdaniAviation- भारत के विमानन क्षेत्र में एक नए घटनाक्रम की चर्चा तेज है। समाचार एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योगपति गौतम अदाणी का समूह नई एयरलाइन शुरू करने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और अंतिम निर्णय भी नहीं लिया गया है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो देश के विमानन बाजार में मौजूदा प्रतिस्पर्धा का समीकरण बदल सकता है, जहां फिलहाल इंडिगो और एयर इंडिया का प्रमुख दबदबा है।

हवाई अड्डों से एयरलाइन तक बढ़ सकता है समूह का दायरा
अदाणी समूह पहले से ही देश के आठ हवाई अड्डों के संचालन से जुड़ा हुआ है, जिनमें मुंबई के दोनों प्रमुख हवाई अड्डे भी शामिल हैं। ऐसे में यदि समूह विमानन सेवा के संचालन में भी प्रवेश करता है, तो यह उसके कारोबारी विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि समूह अभी विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन कर रहा है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है। विमानन कारोबार को पूंजी-प्रधान और कम लाभ वाले क्षेत्रों में गिना जाता है, इसलिए निर्णय से पहले कई पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।
सरकार की प्राथमिकताओं से भी जुड़ी बताई जा रही चर्चा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सरकार ने निजी स्तर पर कुछ बड़े औद्योगिक समूहों को विमानन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह चर्चा ऐसे समय सामने आई है जब हाल के महीनों में एयर इंडिया से जुड़े घटनाक्रम और इंडिगो के परिचालन संबंधी व्यवधानों ने विमानन व्यवस्था की मजबूती को लेकर सवाल खड़े किए थे। सूत्रों के अनुसार, सरकार चाहती है कि बाजार में अधिक मजबूत और सक्षम एयरलाइंस मौजूद हों, जिससे यात्रियों को बेहतर विकल्प मिल सकें और किसी एक या दो कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।
मौजूदा एयरलाइन में निवेश का विकल्प भी खुला
सूत्रों के अनुसार, अदाणी समूह केवल नई एयरलाइन शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी मौजूदा विमानन कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की संभावना पर भी विचार कर रहा है। फिलहाल इस संबंध में किसी कंपनी का नाम सामने नहीं आया है। बताया जा रहा है कि समूह सभी संभावित विकल्पों का अध्ययन कर रहा है ताकि भविष्य की रणनीति व्यावसायिक और नियामकीय दोनों दृष्टि से उपयुक्त हो।
दो कंपनियों का दबदबा बना हुआ है
भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे विमानन बाजारों में शामिल है, लेकिन घरेलू उड़ानों के क्षेत्र में अधिकांश हिस्सेदारी दो प्रमुख कंपनियों के पास है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी लगभग 65.4 प्रतिशत है, जबकि एयर इंडिया करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। दूसरी ओर, पिछले डेढ़ दशक में किंगफिशर एयरलाइंस, जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी कई कंपनियां परिचालन बंद कर चुकी हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे ऊंची परिचालन लागत, कड़ी प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों को प्रमुख कारण मानते हैं।
पहले विमानन सेवा से दूरी बना चुका था समूह
दिलचस्प बात यह है कि पिछले वर्ष दिसंबर में अदाणी एयरपोर्ट्स के निदेशक जीत अदाणी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि समूह की एयरलाइन संचालन में तत्काल रुचि नहीं है। उनका कहना था कि विमानन कारोबार में लाभ का मार्जिन सीमित होता है और समूह की विशेषज्ञता बुनियादी ढांचे तथा हवाई अड्डों के विकास में अधिक है। हाल ही में अदाणी एयरपोर्ट्स ने छह शहरों में हवाई अड्डों से जुड़े वाणिज्यिक क्षेत्रों, जिनमें होटल, खुदरा केंद्र और कार्यालय परिसरों का विकास शामिल है, पर दो अरब डॉलर से अधिक निवेश की योजना भी साझा की थी।
नियामकीय पहलुओं पर भी बनी हुई है नजर
रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने सरकार से उस नियम में बदलाव का आग्रह भी किया है, जो हवाई अड्डा संचालकों को अनुसूचित एयरलाइंस में हिस्सेदारी रखने से रोकता है। वहीं, स्वतंत्र विमानन विश्लेषक ब्रेंडन सोबी ने इस तरह की व्यवस्था में संभावित हितों के टकराव को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता जताई है। फिलहाल अदाणी समूह की ओर से नई एयरलाइन को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और आगे की स्थिति पर उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।