Cancer Risk – अध्ययन में युवाओं की जैविक उम्र को लेकर नई चिंता
Cancer Risk – आधुनिक जीवनशैली, बदलती खानपान की आदतें और पर्यावरण से जुड़े कई कारकों के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता अब एक नए विषय पर केंद्रित होती दिख रही है। हाल के वर्षों में कम उम्र के लोगों में कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के मामले बढ़े हैं। इसी बीच एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने संकेत दिया है कि आज की युवा पीढ़ी में शरीर के भीतर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज हो सकती है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह बदलाव केवल उम्र के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली और कोशिकाओं में होने वाले परिवर्तनों से भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि कम उम्र में गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों को लेकर वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं।
जैविक उम्र पर केंद्रित रहा अध्ययन
ब्रिटेन और अमेरिका के लगभग 1.64 लाख लोगों के रक्त नमूनों का विश्लेषण करने वाले इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने वास्तविक उम्र के साथ-साथ जैविक उम्र का भी मूल्यांकन किया। जैविक उम्र उस स्थिति को दर्शाती है जिसमें शरीर की कोशिकाएं, ऊतक और विभिन्न अंग उम्र बढ़ने के प्रभाव को किस स्तर तक महसूस कर रहे हैं।
अध्ययन में कई ऐसे लोगों की पहचान हुई जिनकी वास्तविक आयु अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन उनके शरीर में उम्र बढ़ने से जुड़े संकेत अधिक दिखाई दिए। शोधकर्ताओं के अनुसार यह स्थिति इस बात का संकेत हो सकती है कि शरीर की आंतरिक क्षति और घिसावट पहले की तुलना में तेजी से बढ़ रही है।
युवाओं में बढ़ रहे हैं उम्र से जुड़े संकेत
शोध में पाया गया कि 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग के कुछ लोगों में ऐसे जैविक बदलाव दिखाई दे रहे हैं, जो पहले आमतौर पर अधिक उम्र में देखने को मिलते थे। वैज्ञानिकों ने विभिन्न पीढ़ियों के स्वास्थ्य आंकड़ों की तुलना करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि हाल के दशकों में जन्मे लोगों में कोशिकीय स्तर पर उम्र बढ़ने के संकेत अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।
विशेष रूप से 1965 से 1974 के बीच जन्मे लोगों के नमूनों में ऐसे परिवर्तन दर्ज किए गए, जो उनसे पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक दिखाई दिए। इससे यह संभावना मजबूत हुई है कि आधुनिक दौर में शरीर की आंतरिक उम्र बढ़ने की गति प्रभावित हो रही है।
किन कारणों को माना जा रहा जिम्मेदार
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से खराब खानपान, बढ़ते मोटापे, धूम्रपान, शराब सेवन, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता को कई गंभीर बीमारियों का कारण मानते रहे हैं। इसके अलावा आंतों में मौजूद सूक्ष्म जीवों के संतुलन में बदलाव और पर्यावरण में मौजूद सूक्ष्म प्लास्टिक कणों के प्रभाव पर भी अध्ययन जारी हैं।
हालिया शोध यह संकेत देता है कि इन बाहरी कारकों के साथ-साथ शरीर के भीतर होने वाली जैविक प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। नींद की गुणवत्ता, लगातार बनी रहने वाली सूजन, प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता और कोशिकाओं की मरम्मत की क्षमता जैसे पहलू भी जैविक उम्र को प्रभावित करते हैं।
कैंसर के बढ़ते मामलों से जुड़ रही कड़ी
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिन लोगों में जैविक उम्र अधिक तेजी से बढ़ रही थी, उनमें कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा देखा गया। पिछले कुछ वर्षों में 20 से 49 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में स्तन कैंसर, आंतों के कैंसर और अग्न्याशय कैंसर जैसे मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन सीधे तौर पर यह साबित नहीं करता कि जैविक उम्र बढ़ना ही कैंसर का कारण है। फिर भी दोनों के बीच संभावित संबंध को लेकर आगे और विस्तृत शोध की आवश्यकता बताई गई है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा
अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि जैविक उम्र केवल व्यक्ति की जन्मतिथि से निर्धारित नहीं होती, बल्कि यह शरीर में समय के साथ जमा हुए नुकसान और स्वास्थ्य की समग्र स्थिति को भी दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार सूजन, कोशिकीय क्षति और प्रतिरक्षा तंत्र में बदलाव जैसी स्थितियां उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन जैसे उपाय शरीर की दीर्घकालिक सेहत को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं। साथ ही इस विषय पर भविष्य में होने वाले शोध युवाओं में बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।