LachitBorphukan – तेज हुई असम के महान योद्धा पर तेजबायोपिक बनाने की तैयारी
LachitBorphukan- असम सरकार राज्य के ऐतिहासिक नायक लचित बोरफुकन के जीवन पर आधारित एक बड़ी फिल्म बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर फिल्म निर्देशक आदित्य धर से बातचीत शुरू हो चुकी है। उनका कहना है कि यदि यह फिल्म बनती है, तो लचित बोरफुकन के साहस, नेतृत्व और ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिल सकती है।

आदित्य धर से हुई प्रारंभिक चर्चा
एक फेसबुक लाइव कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उन्होंने निर्देशक आदित्य धर से इस विषय पर संपर्क किया है। उन्होंने आदित्य धर की हालिया फिल्मी सफलता की सराहना करते हुए कहा कि ऐतिहासिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता इस परियोजना के लिए उपयुक्त हो सकती है। मुख्यमंत्री के अनुसार शुरुआती बातचीत सकारात्मक रही है और उम्मीद है कि अगस्त में आदित्य धर असम पहुंचकर इस विषय पर आगे की चर्चा करेंगे।
रचनात्मक योजना पर होगा मंथन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित मुलाकात के दौरान फिल्म की रूपरेखा, ऐतिहासिक प्रस्तुति और रचनात्मक दृष्टिकोण पर विस्तार से विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश आदित्य धर इस फिल्म का निर्देशन नहीं कर पाते हैं, तो सरकार दूसरे अनुभवी निर्देशकों से भी संपर्क करेगी। उनका उद्देश्य केवल एक उच्च गुणवत्ता वाली बायोपिक तैयार करना है, जो इतिहास के साथ न्याय कर सके।
बजट में भी मिला परियोजना को स्थान
लचित बोरफुकन पर बनने वाली प्रस्तावित फिल्म राज्य सरकार की व्यापक सांस्कृतिक पहल का हिस्सा है। 10 जुलाई को पेश किए गए वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने घोषणा की थी कि असम के प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन पर आधारित फिल्मों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसी योजना के तहत स्वतंत्रता सेनानी कुशल कोंवर के जीवन पर भी फिल्म निर्माण का प्रस्ताव शामिल किया गया है।
कौन थे लचित बोरफुकन
लचित बोरफुकन को असम के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य नेताओं में गिना जाता है। वह अहोम साम्राज्य की सेना के प्रमुख कमांडर थे और वर्ष 1671 में सरायघाट के ऐतिहासिक युद्ध में उनके नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस युद्ध में उन्होंने मुगल सेना के विस्तार को रोकते हुए असम की रक्षा की थी। उनके नेतृत्व, रणनीतिक कौशल और अदम्य साहस को आज भी राज्य के इतिहास में विशेष सम्मान प्राप्त है।
आज भी प्रेरणा हैं लचित बोरफुकन
इतिहासकारों के अनुसार, युद्ध के दौरान गंभीर रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद लचित बोरफुकन ने सेना का नेतृत्व नहीं छोड़ा और अपने सैनिकों का मनोबल बनाए रखा। उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए हर वर्ष ‘लचित दिवस’ मनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। भारतीय सैन्य इतिहास में उनके योगदान को व्यापक रूप से सम्मानित किया जाता है और नई पीढ़ी तक उनकी विरासत पहुंचाने के उद्देश्य से इस प्रस्तावित फिल्म को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।