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WPIInflation – मार्च में थोक महंगाई 3.88% तक पहुंची, ईंधन कीमतों पर पड़ा असर

WPIInflation – देश में थोक महंगाई दर में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। मार्च 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 3.88 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा फरवरी के 2.13 प्रतिशत और पिछले वर्ष मार्च के 2.25 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ऊर्जा क्षेत्र और विनिर्माण लागत में तेजी ने इस बढ़ोतरी को प्रमुख रूप से प्रभावित किया है।

ईंधन और बिजली क्षेत्र में तेजी

उद्योग मंत्रालय के अनुसार, मार्च के दौरान ईंधन और बिजली से जुड़े उत्पादों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। फरवरी में जहां इस श्रेणी में गिरावट देखी गई थी, वहीं मार्च में यह बढ़त के साथ सकारात्मक दायरे में पहुंच गई। खासतौर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी ने इस बदलाव को गति दी है। आंकड़ों के मुताबिक, कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई दर में भारी उछाल दर्ज किया गया, जो पिछले महीने के मुकाबले काफी ज्यादा रही।

विनिर्माण क्षेत्र में लागत का दबाव

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी कीमतों का दबाव बढ़ा है। इस श्रेणी में महंगाई दर फरवरी के मुकाबले बढ़कर 3.39 प्रतिशत हो गई है। बेसिक मेटल्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों की लागत में वृद्धि इसका प्रमुख कारण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे तौर पर घरेलू उद्योगों पर पड़ रहा है।

खाद्य महंगाई में थोड़ी राहत

हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। फूड आर्टिकल्स की महंगाई दर फरवरी के मुकाबले थोड़ी कम हुई है। खासकर सब्जियों की कीमतों में पहले की तुलना में नरमी देखने को मिली है। इससे आम उपभोक्ताओं को आंशिक राहत मिली है, हालांकि कुल महंगाई पर इसका असर सीमित ही रहा।

वैश्विक परिस्थितियों का असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी महंगाई पर साफ दिखाई दे रहा है। हालिया घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इस दौरान कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर से ऊपर पहुंच गईं, जिसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर भी पड़ा है।

सरकार के राहत उपाय

बढ़ती कीमतों के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। यह कदम 26 मार्च को उठाया गया, ताकि तेल कंपनियां पूरी लागत का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर न डालें। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में कुछ मदद मिलेगी।

खुदरा महंगाई और नीति संकेत

थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मार्च में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 3.4 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो फरवरी में 3.21 प्रतिशत थी। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को ध्यान में रखकर नीतिगत निर्णय लेता है।

कुल मिलाकर, ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने थोक महंगाई को ऊपर की ओर धकेला है, जबकि खाद्य क्षेत्र से थोड़ी राहत मिलती नजर आई है। आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार की स्थिति और घरेलू नीतियां महंगाई की दिशा तय करेंगी।

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