RBI Loan Rules – ईएमआई चूकने पर डिवाइस लॉकिंग को लेकर आरबीआई के नए नियम
RBI Loan Rules – भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल माध्यम से दिए जाने वाले कर्ज की वसूली के तरीके को लेकर नए नियमों का ढांचा तय किया है। इसका असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिन्होंने फोन, टैबलेट या लैपटॉप जैसे उपकरण खरीदने के लिए ऋण लिया है। नए प्रावधानों में डिफॉल्ट की स्थिति में तकनीक के जरिये डिवाइस की कुछ सुविधाओं पर रोक लगाने की व्यवस्था को शर्तों से जोड़ा गया है। साथ ही, वसूली एजेंटों के संपर्क करने के समय और कर्जदार की निजता को लेकर भी सीमाएं निर्धारित की गई हैं। इन नियमों का उद्देश्य कर्ज की वसूली और ग्राहक अधिकारों के बीच संतुलन कायम करना है।

डिवाइस लॉक करने की अनुमति किन परिस्थितियों में होगी
आरबीआई के प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, यदि किसी डिवाइस की खरीद के लिए विशेष रूप से ऋण लिया गया है, तो भुगतान में लंबे समय तक चूक होने पर उस डिवाइस की कुछ सुविधाओं को तकनीकी माध्यम से सीमित किया जा सकता है। हालांकि, यह अधिकार बैंक या ऋणदाता को बिना शर्त नहीं दिया गया है। ऋण समझौते में पहले से यह स्पष्ट होना जरूरी होगा कि भुगतान में चूक होने की स्थिति में डिवाइस की सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
कर्जदार के खाते में बकाया होने के तुरंत बाद डिवाइस को बंद करने की अनुमति नहीं होगी। सामग्री के अनुसार, 30 दिन से अधिक की बकाया अवधि और आवश्यक सूचना के बाद ही इस तरह की कार्रवाई की जा सकेगी। पूर्ण प्रतिबंध के लिए 60 दिनों तक भुगतान नहीं होने की शर्त रखी गई है। यानी केवल एक या दो किस्तों में देरी होते ही डिवाइस को तत्काल पूरी तरह निष्क्रिय नहीं किया जा सकेगा।
फोन प्रतिबंधित होने पर कौन सी सुविधाएं चलती रहेंगी
नियमों में ग्राहक की जरूरी सेवाओं और निजी जानकारी की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। डिवाइस पर प्रतिबंध लगाए जाने की स्थिति में आने वाली कॉल, संदेश सेवा और आपातकालीन एसओएस जैसी सुविधाएं जारी रखने का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा ऋणदाता या उसके लिए काम करने वाली तकनीकी कंपनी को ग्राहक की निजी तस्वीरों, संपर्क सूची, संदेशों, कॉल विवरण या स्थान संबंधी इतिहास तक पहुंच की अनुमति नहीं होगी।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऋण वसूली के नाम पर ग्राहक की निजी डिजिटल जानकारी का अनधिकृत इस्तेमाल न हो। यानी डिवाइस पर नियंत्रण से जुड़ी कार्रवाई और निजी डेटा तक पहुंच को अलग-अलग रखा जाएगा।
रिकवरी एजेंटों के लिए भी तय की गई सीमाएं
आरबीआई के नए प्रावधानों में ऋण वसूली के लिए फोन करने वाले एजेंटों के व्यवहार को लेकर भी नियम प्रस्तावित हैं। एजेंटों को सुबह आठ बजे से शाम सात बजे के बीच ही कर्जदार से संपर्क करने की अनुमति होगी। बातचीत कर्जदार या गारंटर तक सीमित रखनी होगी। रिश्तेदारों, सहकर्मियों या पड़ोसियों को कर्ज की जानकारी देकर दबाव बनाने अथवा सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसी गतिविधियों पर रोक रहेगी।
इसके अलावा शादी, गंभीर चिकित्सकीय स्थिति या परिवार में मृत्यु जैसे संवेदनशील मौकों पर घर जाकर वसूली करने की मनाही होगी। बैंकों को रिकवरी से संबंधित फोन कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा और इन रिकॉर्ड को कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी बताई गई है।
भुगतान के बाद सेवाएं बहाल करने का प्रावधान
यदि ग्राहक बकाया राशि का भुगतान कर देता है, तो डिवाइस पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया भी तय समय के भीतर पूरी करनी होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भुगतान के बाद बैंक को एक घंटे के भीतर संबंधित सेवाएं बहाल करनी होंगी। निर्धारित समय के बाद देरी होने पर ग्राहक को प्रति घंटे 250 रुपये की क्षतिपूर्ति दिए जाने का प्रावधान बताया गया है, हालांकि इसकी अधिकतम सीमा ऋण राशि तक रखी जा सकती है।
इन प्रावधानों से डिजिटल ऋण लेने वाले ग्राहकों के लिए यह स्पष्ट संदेश जाता है कि भुगतान में गंभीर चूक की स्थिति में ऋणदाता के पास कुछ तकनीकी उपाय हो सकते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल तय शर्तों और ग्राहक सुरक्षा के दायरे में ही किया जाना होगा