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PVC – आयात नियम सख्त होने से घर निर्माण और खेती की लागत बढ़ने के आसार

PVC – केंद्र सरकार की ओर से प्लास्टिक कच्चे माल के आयात से जुड़े नियमों में किए गए बदलाव का असर जल्द ही आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर दिखाई दे सकता है। नए प्रावधानों के तहत सस्ते विदेशी Suspension Grade Polyvinyl Chloride (S-PVC) Resin के आयात पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से PVC आधारित उत्पादों की लागत बढ़ सकती है, जिससे घर निर्माण, कृषि और कई रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।

क्या बदले हैं आयात नियम?

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने S-PVC Resin के आयात को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत 0.76 डॉलर प्रति किलोग्राम या उससे कम कीमत पर आयात होने वाले इस कच्चे माल के लिए अब लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। S-PVC Resin का उपयोग पानी की पाइप, बिजली के तारों की कोटिंग, खिड़कियों के फ्रेम, पैकेजिंग सामग्री, चिकित्सा उपकरणों और जूते-चप्पलों सहित कई उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। ऐसे में नियमों में बदलाव का प्रभाव कई उद्योगों तक पहुंच सकता है।

घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने की आशंका

व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर सख्ती से घरेलू बाजार में S-PVC Resin की उपलब्धता और कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। Global Trade Research Initiative (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 1.63 अरब डॉलर मूल्य का S-PVC Resin आयात किया था। चीन इसके सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा, जबकि जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, इंडोनेशिया, थाईलैंड, अमेरिका, सिंगापुर और वियतनाम से भी बड़ी मात्रा में आयात हुआ। इन देशों से आने वाले अधिकांश उत्पाद निर्धारित न्यूनतम मूल्य से कम कीमत पर थे, इसलिए अब उनका आयात नई शर्तों के दायरे में आएगा।

घर निर्माण और खेती पर पड़ सकता है असर

PVC आधारित उत्पादों का उपयोग निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर होता है। घरों में पानी की पाइपलाइन, फिटिंग, बिजली की वायरिंग और कई अन्य जरूरी सामग्री इसी कच्चे माल से तैयार की जाती है। यदि S-PVC Resin महंगा होता है, तो इसका असर अंतिम उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली अधिकांश पाइपें भी PVC से बनती हैं। ऐसे में किसानों की लागत बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

रोजमर्रा के सामान भी हो सकते हैं महंगे

PVC का उपयोग केवल निर्माण और कृषि तक सीमित नहीं है। पैकेजिंग सामग्री, कुछ चिकित्सा उत्पाद, प्लास्टिक से बने घरेलू सामान और जूते-चप्पलों के निर्माण में भी इसका व्यापक इस्तेमाल होता है। यदि कच्चे माल की लागत बढ़ती है, तो इन उत्पादों के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं। इससे दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं पहले की तुलना में महंगी हो सकती हैं।

छोटे उद्योगों के सामने बढ़ सकती हैं चुनौतियां

देश में PVC पाइप, केबल और अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयां कार्यरत हैं। उद्योग जगत का मानना है कि यदि सस्ते आयातित कच्चे माल की उपलब्धता घटती है, तो उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इससे छोटे उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा बनाए रखना कठिन हो सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कुल S-PVC Resin आवश्यकता का लगभग 64 प्रतिशत आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए आयात नीति में बदलाव का असर पूरे उद्योग पर पड़ सकता है।

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