RERA – सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रॉपर्टी प्रचार के लिए बिल्डर होंगे जिम्मेदार
RERA – उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने सोशल मीडिया पर रियल एस्टेट परियोजनाओं के प्रचार को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब किसी आवासीय या भूखंड परियोजना का भ्रामक प्रचार, गलत जानकारी या अपंजीकृत प्रोजेक्ट का प्रचार-प्रसार होने पर कार्रवाई का दायरा केवल सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसे मामलों में संबंधित बिल्डर को जवाबदेह माना जाएगा। यूपी रेरा का कहना है कि घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

सोशल मीडिया प्रचार पर बढ़ेगी निगरानी
यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने वर्ष 2026 की पहली छमाही की रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि प्राधिकरण अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रियल एस्टेट परियोजनाओं के प्रचार की नियमित निगरानी करेगा। यदि किसी अपंजीकृत परियोजना का प्रचार किया जाता है या निवेशकों को गुमराह करने वाली जानकारी साझा की जाती है, तो संबंधित बिल्डर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान और आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए केंद्र सरकार के संबंधित विभागों से भी समन्वय किया जाएगा।
नई परियोजनाओं में निवेश का रुझान जारी
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच प्रदेश में 143 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ है। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब 46,049 नई आवासीय इकाइयों के बाजार में आने की संभावना है। यूपी रेरा के मुताबिक, इससे स्पष्ट होता है कि प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश की गति बनी हुई है और घर खरीदने वालों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
लखनऊ और गौतम बुद्ध नगर रहे प्रमुख केंद्र
आंकड़ों के अनुसार, पहली छमाही में 37 नई परियोजनाओं के साथ लखनऊ सबसे आगे रहा। इसके बाद गौतम बुद्ध नगर में 27, गाजियाबाद में 19, आगरा में 10 और प्रयागराज में तीन नई परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ। हालांकि कुल निवेश और आवासीय इकाइयों की संख्या के मामले में गौतम बुद्ध नगर अब भी प्रदेश का सबसे बड़ा रियल एस्टेट केंद्र बना हुआ है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एनसीआर क्षेत्र में प्रीमियम और लक्जरी प्रोजेक्ट्स में निवेश जारी है, जबकि एनसीआर से बाहर भी आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का विस्तार तेज हुआ है।
खरीदारों को मिली हजारों करोड़ रुपये की राहत
यूपी रेरा ने बताया कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में 8,212 मामलों में घर खरीदारों को कुल 2,173.78 करोड़ रुपये वापस दिलाए गए। इनमें जिला प्रशासन के सहयोग से 6,411 मामलों में लगभग 1,623 करोड़ रुपये संबंधित खरीदारों के खातों में लौटाए गए। वहीं बिल्डरों और आवंटियों के बीच आपसी समझौते के माध्यम से 1,801 मामलों में 550.50 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया।
विवाद निस्तारण में भी तेजी
प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, रेरा की पीठों ने 3,237 मामलों में करीब 1,958 करोड़ रुपये से जुड़े विवादों का निपटारा किया। इसके अलावा सुलह मंच के माध्यम से 1,648 मामलों में 657 करोड़ रुपये के विवाद सुलझाए गए। ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए भी 6,673 आवंटियों से जुड़े लगभग 3,417.42 करोड़ रुपये के मामलों का आपसी सहमति से समाधान कराया गया। यूपी रेरा का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य घर खरीदारों का विश्वास बनाए रखना और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता को मजबूत करना है।