ITR – जानें रिटर्न दाखिल करने से पहले क्यों जरूरी है AIS की जानकारी जांचना
ITR – आयकर रिटर्न दाखिल करने की तैयारी कर रहे करदाताओं के लिए केवल Form 16 के आधार पर रिटर्न भरना पर्याप्त नहीं माना जाता। विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न जमा करने से पहले Annual Information Statement (AIS) में दर्ज सभी वित्तीय जानकारियों का मिलान करना जरूरी है। यदि रिटर्न में दर्ज विवरण और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो रिफंड में देरी, अतिरिक्त जांच या अन्य कर संबंधी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

क्या है Annual Information Statement
Annual Information Statement यानी AIS आयकर विभाग की ऑनलाइन सेवा है, जिसमें किसी वित्तीय वर्ष के दौरान पैन से जुड़े प्रमुख वित्तीय लेनदेन का विवरण उपलब्ध होता है। इसमें बैंक, नियोक्ता, म्यूचुअल फंड कंपनियां, स्टॉक ब्रोकर, संपत्ति पंजीकरण कार्यालय और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा साझा की गई जानकारी शामिल रहती है। जैसे-जैसे विभिन्न संस्थान TDS, TCS, Statement of Financial Transactions (SFT) और टैक्स भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड विभाग को भेजते हैं, वैसे-वैसे यह विवरण पोर्टल पर अपडेट होता रहता है।
इस तरह देख सकते हैं अपना AIS
करदाता आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करके AIS आसानी से देख और डाउनलोड कर सकते हैं। लॉगिन के बाद Dashboard या Services सेक्शन में उपलब्ध AIS विकल्प का चयन करना होता है। इसके बाद संबंधित वित्तीय वर्ष चुनने पर AIS और Taxpayer Information Summary (TIS) के विकल्प दिखाई देते हैं। AIS खोलने पर व्यक्तिगत जानकारी के साथ वित्तीय लेनदेन का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध होता है। इसमें TDS और TCS का विवरण, बड़े वित्तीय लेनदेन, जमा किए गए टैक्स, पुराने रिफंड या टैक्स डिमांड तथा अन्य कर संबंधी सूचनाएं अलग-अलग श्रेणियों में प्रदर्शित की जाती हैं।
रिटर्न दाखिल करने से पहले करें आंकड़ों का मिलान
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AIS में उपलब्ध जानकारी का मिलान Form 26AS और Form 16 से अवश्य किया जाना चाहिए। यदि किसी आय, निवेश या लेनदेन का रिकॉर्ड अलग दिखाई देता है, तो उसे पहले स्पष्ट करना बेहतर रहता है। इससे रिटर्न में सही जानकारी दर्ज करने में सुविधा होती है और भविष्य में कर विभाग की ओर से किसी प्रकार की स्पष्टीकरण प्रक्रिया की संभावना भी कम हो जाती है। सही और अद्यतन जानकारी के आधार पर दाखिल किया गया रिटर्न रिफंड प्रक्रिया को भी सुगम बना सकता है।
गलत जानकारी मिलने पर उपलब्ध है सुधार की सुविधा
यदि किसी करदाता को AIS में ऐसा लेनदेन दिखाई देता है जो उसका नहीं है या उसमें किसी प्रकार की त्रुटि है, तो आयकर विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन फीडबैक दर्ज किया जा सकता है। विभाग इस फीडबैक के आधार पर संबंधित जानकारी की समीक्षा करता है और आवश्यक होने पर TIS में संशोधन भी किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर लेने से भविष्य में नोटिस या अन्य कर संबंधी परेशानियों की संभावना कम हो सकती है। इसलिए जल्दबाजी में रिटर्न दाखिल करने के बजाय सभी रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच करना अधिक उचित माना जाता है।