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India Housing Affordability 2025: घर खरीदना हुआ आसान, 2025 में हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी में आया बड़ा सुधार

India Housing Affordability 2025: भारत में साल 2025 के दौरान अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए सकारात्मक खबरें सामने आई हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, (Housing Market Trends) हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स में इस साल महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है। इसका सबसे बड़ा कारण ब्याज दरों में आई गिरावट है, जिसने मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ने वाले ईएमआई के बोझ को कम कर दिया है और उन्हें रियल एस्टेट निवेश के लिए प्रेरित किया है।

India Housing Affordability 2025
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किफायती शहरों की सूची में अहमदाबाद और पुणे सबसे आगे

रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, देश के आठ प्रमुख शहरों में घर खरीदने की क्षमता 2010 के बाद से अपने बेहतरीन स्तर पर है। (Affordable Housing Cities) अहमदाबाद, पुणे और कोलकाता इस सूची में सबसे ऊपर हैं, जिन्हें भारत के सबसे किफायती हाउसिंग मार्केट के रूप में पहचाना गया है। अहमदाबाद में ईएमआई-टू-इनकम अनुपात महज 18 फीसदी रहा है, जिसका अर्थ है कि वहां के लोग अपनी आय का एक छोटा हिस्सा ही घर की किस्तों में खर्च कर रहे हैं।

मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में ऐतिहासिक बदलाव

भारत के सबसे महंगे प्रॉपर्टी बाजार माने जाने वाले मुंबई में इस बार एक ऐतिहासिक सुधार देखने को मिला है। यहां (Mumbai Real Estate Improvement) ईएमआई-टू-इनकम अनुपात पहली बार 50 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरकर 47 फीसदी पर आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई जैसे शहर में यह गिरावट घर खरीदने के लिहाज से एक टिकाऊ और सकारात्मक संकेत है, जिससे भविष्य में मांग और बढ़ने की संभावना है।

ऑफिस स्पेस लीजिंग में बना नया कीर्तिमान

हाउसिंग के साथ-साथ ऑफिस रियल एस्टेट बाजार ने भी साल 2025 में सफलता की नई कहानी लिखी है। कोलियर्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, (Office Space Leasing Record) पहली बार देश में ऑफिस स्पेस की लीजिंग 71.5 मिलियन वर्ग फुट के पार पहुंच गई है। बंगलूरू और दिल्ली-एनसीआर जैसे महानगरों ने इस मांग को पूरा करने में 60 फीसदी की हिस्सेदारी निभाई है, जो भारत के मजबूत कॉर्पोरेट सेक्टर की ओर इशारा करता है।

टेक्नोलॉजी कंपनियों और जीसीसी की बढ़ती मांग

ऑफिस स्पेस की इस भारी मांग के पीछे मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी कंपनियों और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का हाथ रहा है। कुल मांग में (Technology Sector Office Demand) करीब 37 फीसदी हिस्सा टेक कंपनियों का है, जबकि जीसीसी ने 30 मिलियन वर्ग फुट से अधिक स्थान लिया है। टियर-2 शहरों में भी फ्लेक्स और मैनेज्ड वर्कस्पेस का विस्तार हो रहा है, जिससे 2026 में भी इस क्षेत्र में मजबूती बने रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

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