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GoldLoanGrowth – भारत में गोल्ड लोन बाजार ने दर्ज की तेज विस्तार दर

GoldLoanGrowth – भारत में गोल्ड लोन अब केवल जरूरत के समय काम आने वाला विकल्प नहीं रहा, बल्कि यह धीरे-धीरे एक भरोसेमंद और व्यवस्थित ऋण साधन के रूप में उभर चुका है। ट्रांसयूनियन सिबिल की अप्रैल 2026 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इस सेक्टर में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। मार्च 2022 से दिसंबर 2025 के बीच देश के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में करीब 3.8 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी के साथ रिटेल क्रेडिट पोर्टफोलियो में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 11.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे यह होम लोन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है।

कर्ज की राशि और औसत टिकट साइज में बदलाव

रिपोर्ट यह संकेत देती है कि लोगों की उधारी से जुड़ी प्राथमिकताओं में बदलाव आया है। पहले जहां छोटे अमाउंट के लिए गोल्ड लोन लिया जाता था, अब इसकी औसत टिकट साइज में बड़ा उछाल देखने को मिला है। आंकड़ों के मुताबिक, औसत लोन राशि लगभग 90 हजार रुपये से बढ़कर करीब दो लाख रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह प्रति ग्राहक औसत बकाया राशि भी 1.9 लाख रुपये से बढ़कर 3.1 लाख रुपये तक जा पहुंची है। इस बढ़त के पीछे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और सरकारी बैंकों की अहम भूमिका रही है, जिन्होंने इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार किया है।

ग्राहक प्रोफाइल में हो रहा बदलाव

गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों की प्रोफाइल में भी स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिला है। अब इस श्रेणी में केवल नए या सीमित क्रेडिट इतिहास वाले लोग ही नहीं, बल्कि मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहक भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। प्राइम और उससे ऊपर के ग्राहकों की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 52 प्रतिशत हो गई है। इसके विपरीत, पहली बार कर्ज लेने वालों की संख्या में गिरावट आई है, जो यह दर्शाता है कि अनुभवी उधारकर्ता अब गोल्ड लोन को एक स्थिर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है, जो एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव का संकेत है। साल 2025 के दौरान कुल गोल्ड लोन वैल्यू का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं द्वारा लिया गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महिलाएं अब वित्तीय निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और गोल्ड लोन को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में अपना रही हैं। यह प्रवृत्ति खासतौर पर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ज्यादा स्पष्ट रूप से सामने आई है।

नए क्षेत्रों में बाजार का विस्तार

हालांकि दक्षिण भारत पारंपरिक रूप से गोल्ड लोन बाजार का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन अब अन्य राज्यों में भी इसकी पहुंच तेजी से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में इस सेक्टर की ग्रोथ दर उल्लेखनीय रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि गोल्ड लोन का बाजार अब क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर देशभर में अपनी मजबूत पकड़ बना रहा है।

बढ़ते कर्ज के साथ उभरते जोखिम

तेजी से बढ़ते इस बाजार के साथ कुछ जोखिम भी सामने आ रहे हैं, जिन पर रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है। कई ग्राहक एक साथ एक से अधिक गोल्ड लोन ले रहे हैं, जिससे उनका कुल कर्ज बोझ बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में लिए गए लोन में से 54 प्रतिशत ऐसे ग्राहकों के थे जिनका कुल गोल्ड लोन एक्सपोजर 2.5 लाख रुपये से अधिक था। इसके अलावा, जिन ग्राहकों की पूरी उधारी केवल गोल्ड लोन पर आधारित है, उनमें डिफॉल्ट की संभावना काफी ज्यादा पाई गई है।

नियामकीय सख्ती और नई गाइडलाइंस

बढ़ते जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने 2025-26 के दौरान कुछ नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत लोन टू वैल्यू (LTV) अनुपात को अलग-अलग श्रेणियों में सीमित किया गया है। छोटे लोन पर 85 प्रतिशत तक की अनुमति है, जबकि बड़े लोन पर यह सीमा घटाकर 75 प्रतिशत तक कर दी गई है। इसके साथ ही टॉप-अप या लोन रिन्यूअल के मामलों में अब नई क्रेडिट जांच अनिवार्य कर दी गई है, जिससे जोखिम को नियंत्रित किया जा सके।

विशेषज्ञों की नजर में बदलता परिदृश्य

वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन अब केवल आपातकालीन जरूरतों तक सीमित नहीं है। मुथूट फिनकॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शाजी वर्गीज के अनुसार, आज का ग्राहक अधिक जागरूक है और वह अपने वित्तीय निर्णय सोच-समझकर ले रहा है। उनके मुताबिक, गोल्ड लोन को अब एक संगठित और भरोसेमंद क्रेडिट विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो व्यापक वित्तीय योजना का हिस्सा बन चुका है।

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