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DieselExport – डीजल और एटीएफ निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी, लागू हुई नई दरें

DieselExport – केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े शुल्क ढांचे में बदलाव करते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में वृद्धि की है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लिया जाएगा। हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल पर लागू मौजूदा उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

मंगलवार से प्रभावी हुई संशोधित दरें

राजस्व विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार संशोधित शुल्क दरें मंगलवार से लागू हो चुकी हैं। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए इन शुल्कों की समीक्षा करती है। हालिया संशोधन भी वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में आए बदलावों को ध्यान में रखकर किया गया है।

पखवाड़े में होती है शुल्क की समीक्षा

पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए जाने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और अन्य संबंधित उपकरों की समीक्षा प्रत्येक 15 दिन में की जाती है। इससे पहले शुल्क दरों में बदलाव 1 जून से लागू हुआ था। अधिकारियों के अनुसार शुल्क निर्धारण के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल, डीजल, पेट्रोल और एटीएफ की औसत कीमतों का आकलन किया जाता है, ताकि घरेलू और निर्यात बाजार के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

ईंधन उपलब्धता को लेकर सरकार का आश्वासन

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। मंत्रालय का कहना है कि उपभोक्ताओं को ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने नागरिकों और उद्योगों दोनों से ऊर्जा संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील भी की है।

खुदरा पंपों पर दबाव कम करने की कोशिश

हाल ही में आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में खुदरा पेट्रोल पंपों पर मांग बढ़ने के कारण अतिरिक्त दबाव देखने को मिला है। उनके अनुसार मई महीने के दौरान बड़ी मात्रा में डीजल की खरीद थोक या उपभोक्ता पंपों के बजाय खुदरा पंपों के माध्यम से होने लगी, जिससे वितरण व्यवस्था पर असर पड़ा।

उन्होंने बताया कि अनुमानित रूप से करीब 42 करोड़ लीटर डीजल की खपत का रुझान खुदरा आउटलेट्स की ओर स्थानांतरित हुआ। इसी कारण सरकार ने बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए उपभोक्ता पंपों का उपयोग करने की सलाह दी है।

डीजल बिक्री पर अस्थायी सीमा लागू

आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने डीजल की खुदरा बिक्री पर अस्थायी सीमा निर्धारित की है। 11 जून को जारी आदेश के अनुसार किसी व्यक्ति को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही खुदरा पंप से दिया जाएगा। यह व्यवस्था सीमित अवधि के लिए लागू की गई है।

90 दिनों तक लागू रह सकती है व्यवस्था

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यह कदम लगभग 90 दिनों के लिए अस्थायी रूप से लागू किया गया है। इसका उद्देश्य ईंधन वितरण प्रणाली को संतुलित रखना और आम उपभोक्ताओं को संभावित असुविधा से बचाना है। मंत्रालय का कहना है कि देश की रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं और कच्चे तेल की उपलब्धता भी पर्याप्त है। ऐसे में ईंधन आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।

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