MidDayMeal – गंडामन त्रासदी के 13 वर्ष बाद भी जिंदा हैं दर्द और अधूरे वादे…
MidDayMeal – बिहार के सारण जिले के मशरक प्रखंड स्थित धर्मासती गंडामन गांव में 16 जुलाई 2013 को हुई मिड डे मील त्रासदी को आज 13 वर्ष पूरे हो गए। विषाक्त भोजन खाने से 23 स्कूली बच्चों की मौत और कई अन्य बच्चों के बीमार पड़ने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। यह हादसा आज भी देश की सबसे दर्दनाक विद्यालयी घटनाओं में गिना जाता है और स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवालों की याद दिलाता है।

बरसी पर फिर ताजा हो जाता है अपनों को खोने का दर्द
गंडामन गांव में हर वर्ष 16 जुलाई शोक और स्मरण का दिन बनकर आता है। हादसे में अपने बच्चों को खो चुके परिवार आज भी उस दिन की याद से उबर नहीं पाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई परिवारों ने एक ही दिन में अपने दो-दो बच्चों को खो दिया था, जिससे पूरा गांव लंबे समय तक सदमे में रहा। पीड़ित अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय परिसर और उससे जुड़ी यादें आज भी उनके लिए गहरे भावनात्मक दर्द का कारण हैं।
श्रद्धांजलि के साथ अधूरे वादों की भी होती है चर्चा
हादसे में बेटी को खो चुके शंकर ठाकुर बताते हैं कि हर बरसी पर गांव में दिवंगत बच्चों को श्रद्धांजलि दी जाती है और स्मारक पर लोग एकत्र होकर उन्हें याद करते हैं। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग भी कार्यक्रम में शामिल होते हैं। हालांकि श्रद्धांजलि के साथ उन घोषणाओं और विकास योजनाओं की भी चर्चा होती है, जिनमें से कई अब तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।
हादसे के बाद बदले नियम, सुरक्षा पर बढ़ा जोर
घटना के बाद राज्य सरकार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी और विद्यालयों में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना के लिए कई नए दिशा-निर्देश लागू किए गए। भोजन तैयार करने से लेकर परोसने तक की प्रक्रिया में गुणवत्ता जांच, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण, स्वच्छता और नियमित निगरानी को अनिवार्य बनाया गया। भोजन परोसने से पहले उसके परीक्षण और रसोईघर में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसे प्रावधान भी लागू किए गए। यह त्रासदी आज भी प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण सीख मानी जाती है।
विकास कार्य हुए, लेकिन कई अपेक्षाएं अब भी बाकी
स्थानीय निवासी अखिलानंद मिश्रा के अनुसार हादसे के बाद गंडामन गांव के विकास के लिए कई घोषणाएं की गई थीं। विद्यालय का नया भवन बनाया गया, उसे उच्चीकृत किया गया और दिवंगत बच्चों की स्मृति में स्मारक का निर्माण कराया गया। इसके अलावा इंटर कॉलेज, स्वास्थ्य उपकेंद्र, जलमीनार, सड़क निर्माण, बिजली, पक्के आवास, पेंशन योजनाओं और तालाब के विकास जैसे कई कार्य पूरे हुए। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और सभी सड़कों के पूर्ण विकास की जरूरत अब भी बनी हुई है।
प्रशासन ने दोहराई सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने की प्रतिबद्धता
सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा है कि गंडामन जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन लगातार सतर्क है। उनके अनुसार विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और रसोइयों को समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। खाद्य सामग्री की जांच, स्वच्छ भंडारण, भोजन की गुणवत्ता की निगरानी और रसोईघर में अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक जैसे नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी दिवंगत बच्चों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
सुरक्षित मध्यान्ह भोजन व्यवस्था की जरूरत पर जोर
स्थानीय लोगों का मानना है कि हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब सभी विद्यालयों में सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि बेहतर शिक्षा और बच्चों की सुरक्षा किसी भी व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। गंडामन की त्रासदी आज भी इस बात की याद दिलाती है कि लापरवाही की छोटी सी चूक भी कितने बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।