बिहार

CrimeAlert – गिरफ्तार हुआ फर्जी ईडी अधिकारी बनकर ठगी करने वाला आरोपी

CrimeAlert – बिहार में खुद को प्रवर्तन निदेशालय का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करने और ठगी के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान अभिषेक अग्रवाल के रूप में हुई है, जिसे स्पेशल टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पटना से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, वह लंबे समय से सरकारी अधिकारियों और आम लोगों को फर्जी कॉल कर भ्रमित कर रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पहले भी चर्चित मामलों में सामने आ चुका है। इस बार उसके खिलाफ भोजपुर जिले के नवादा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया।

डीएम को कॉल के बाद बढ़ी जांच

पुलिस जांच के मुताबिक, 27 अप्रैल को आरोपी ने एक जिला अधिकारी को खुद को ईडी अधिकारी बताकर फोन किया था। कॉल के दौरान उसने आधिकारिक शैली में बातचीत कर भरोसा जीतने की कोशिश की। मामला संदिग्ध लगने पर प्रशासन ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।

तकनीकी सर्विलांस और कॉल डिटेल की मदद से पुलिस को आरोपी की लोकेशन पटना के नागेश्वर कॉलोनी इलाके में मिली। इसके बाद एसटीएफ की टीम ने छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी को संबंधित थाने की पुलिस के हवाले कर दिया गया है और उससे पूछताछ जारी है।

पहले भी सामने आ चुका है नाम

अभिषेक अग्रवाल का नाम इससे पहले वर्ष 2022 में भी एक चर्चित मामले में सामने आया था। उस समय उस पर आरोप लगा था कि उसने पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के नाम का इस्तेमाल करते हुए तत्कालीन डीजीपी को फोन किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसने उस कॉल के जरिए एक मामले को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

उस प्रकरण में आर्थिक अपराध इकाई ने कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। आरोपी को उस समय गिरफ्तार भी किया गया था, हालांकि बाद में उसे जमानत मिल गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुरानी घटनाओं को भी नए मामले से जोड़कर जांच की जा रही है।

अधिकारियों से करीबी बढ़ाकर बनाता था भरोसा

जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी खुद को प्रभावशाली दिखाने के लिए कई प्रशासनिक अधिकारियों से मेलजोल बढ़ाता था। सोशल मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर वह लोगों के बीच भरोसा कायम करने की कोशिश करता था। पुलिस को जांच के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक भाषा का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करता था। इसी कारण कई लोग शुरुआती दौर में उसकी बातों पर भरोसा कर लेते थे। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

आर्थिक अपराध इकाई भी कर रही जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई भी सक्रिय हो गई है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी ने कितने लोगों को निशाना बनाया और उसके जरिए किसी आर्थिक लेनदेन को अंजाम दिया गया या नहीं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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