Crime – मुंगेर मंडल कारा में बंद विचाराधीन बंदी की मौत, शुरू हुई जांच
Crime – बिहार के मुंगेर मंडल कारा से शुक्रवार सुबह एक गंभीर घटना सामने आई, जहां न्यायिक हिरासत में बंद एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जेल प्रशासन के अनुसार, बंदी ने कथित तौर पर जेल परिसर की ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस और जेल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

43 दिनों से न्यायिक हिरासत में था बंदी
मृतक की पहचान हवेली खड़गपुर थाना क्षेत्र के मधुवन दरियापुर गांव निवासी 21 वर्षीय मनीष कुमार के रूप में हुई है। मंडल कारा अधीक्षक किरण निधि ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद, सदर डीएसपी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे तथा मामले की जानकारी ली। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है।
हत्या के मामले में भेजा गया था जेल
पुलिस के मुताबिक, मनीष कुमार अपने सगे भाई की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि 18 मई की रात उसने सो रहे भाई पर हथौड़े से हमला किया था, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद 20 मई को अदालत के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में मंडल कारा भेज दिया गया, जहां वह पिछले 43 दिनों से बंद था।
जेल प्रशासन ने बताया घटनाक्रम
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह बंदी ने कथित रूप से जेल की छत से छलांग लगा दी। गिरने से उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। जेल कर्मियों ने बिना देरी किए उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद जेल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और परिस्थितियों की भी समीक्षा की जा रही है।
सभी पहलुओं की हो रही जांच
पुलिस और जेल प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों, जेल परिसर की परिस्थितियों और अन्य संबंधित तथ्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।