CBI – समस्तीपुर रेल मंडल रिश्वत मामले में रिमांड पूछताछ से जांच ने पकड़ी रफ्तार
CBI – समस्तीपुर रेल मंडल में सामने आए कथित रिश्वतखोरी मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। न्यायिक हिरासत में बेउर केंद्रीय कारागार में बंद रेल मंडल के सहायक कार्मिक पदाधिकारी (APO-2) अरुण मंडल को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) रिमांड पर समस्तीपुर लेकर पहुंची है। एजेंसी अब उनसे विस्तृत पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि कथित रिश्वत प्रकरण में और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं। साथ ही विभागीय स्तर पर संभावित मिलीभगत, वित्तीय लेनदेन और जांच के दौरान बरामद अन्य साक्ष्यों की भी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

ट्रैप कार्रवाई के बाद शुरू हुई थी जांच
इस मामले की शुरुआत 23 जुलाई को हुई थी, जब CBI ने समस्तीपुर रेल मंडल कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई करते हुए अरुण मंडल को कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। एजेंसी के अनुसार, यह राशि रेलवे कर्मचारी से सेवा संबंधी कार्य के बदले मांगी गई थी। गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों ने कार्यालय में कई घंटों तक दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की, जिससे पूरे रेल मंडल में हलचल मच गई।
शिकायत के बाद की गई थी गोपनीय पड़ताल
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, रेलवे के डीलिंग क्लर्क अमृत राज ने लगभग डेढ़ माह पहले CBI को शिकायत दी थी। आरोप लगाया गया था कि उनसे एक प्रशासनिक कार्य के बदले एक लाख रुपये की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पहले पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन किया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई गई और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।
सरकारी आवास की तलाशी में मिले हथियार
गिरफ्तारी के बाद CBI ने आरोपी के सरकारी आवास की भी तलाशी ली। जांच के दौरान वहां से एक पिस्टल, दो मैगजीन और नौ जिंदा कारतूस बरामद होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद स्थानीय नगर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत अलग मामला दर्ज किया गया। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि बरामद हथियार का स्रोत क्या था और उसे किस उद्देश्य से रखा गया था।
रिमांड पूछताछ में कई बिंदुओं पर फोकस
रिमांड अवधि के दौरान CBI यह स्पष्ट करने की कोशिश करेगी कि कथित रिश्वत की रकम केवल आरोपी तक सीमित थी या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क भी सक्रिय था। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या रेलवे में सेवा संबंधी मामलों, पदस्थापन या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अवैध धन उगाही की कोई संगठित व्यवस्था संचालित की जा रही थी। पूछताछ के दौरान वित्तीय लेनदेन, विभागीय संपर्कों और अन्य संभावित कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।
रेल मंडल कार्यालय में बढ़ी गतिविधियां
अरुण मंडल के रिमांड पर समस्तीपुर पहुंचने के बाद रेल मंडल कार्यालय में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ से मिलने वाले इनपुट के आधार पर CBI अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से भी जानकारी जुटा सकती है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा और विस्तृत हो सकता है। फिलहाल एजेंसी पूरे मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आधिकारिक निष्कर्ष आने का इंतजार किया जा रहा है।