HormuzStrait – ईरान की अनुमति के बाद सुरक्षित निकले भारतीय एलपीजी जहाज
HormuzStrait – पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान की ओर से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग देने के निर्णय के बाद भारत का एलपीजी टैंकर शिवालिक इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को सफलतापूर्वक पार कर चुका है। इसी मार्ग से दूसरा भारतीय एलपीजी जहाज नंदा देवी भी सुरक्षित बाहर निकल गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई थी।

भारतीय नौसेना की निगरानी में आगे बढ़ रहा है शिवालिक
सरकारी सूत्रों के अनुसार एलपीजी टैंकर शिवालिक इस समय भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहा है। जहाज संवेदनशील क्षेत्र से निकलकर खुले समुद्र में पहुंच चुका है।
अधिकारियों का अनुमान है कि यह जहाज अगले कुछ दिनों में भारत के किसी बंदरगाह तक पहुंच जाएगा। फिलहाल इसके 21 मार्च तक मुंबई या कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इस जहाज की सुरक्षित आवाजाही को भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कूटनीतिक संवाद के बाद बना रास्ता
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई थी। इस चर्चा में ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक वस्तुओं के सुरक्षित परिवहन को लेकर विचार-विमर्श किया गया था।
माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच हुए इस कूटनीतिक संवाद के बाद भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हुआ। इससे क्षेत्र में संचालित भारतीय जहाजों को राहत मिली है।
ईरानी राजदूत ने भी दिए थे संकेत
इससे पहले भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भी संकेत दिया था कि बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों को जल्द सुरक्षित मार्ग मिल सकता है। उन्होंने कहा था कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मित्रतापूर्ण संबंध हैं और दोनों देशों के इस क्षेत्र में साझा हित हैं।
राजदूत के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में भारत सरकार ने युद्ध के बाद विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद भी की है। इसी पृष्ठभूमि में दोनों देशों के बीच सहयोग का माहौल बना हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की मंशा नहीं
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भी स्पष्ट किया है कि ईरान की मंशा कभी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की नहीं रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन मार्ग पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।
उनके अनुसार कई जहाज अभी भी इस समुद्री रास्ते से गुजर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक नेताओं को मौजूदा संघर्ष को रोकने के लिए प्रयास करना चाहिए, क्योंकि इसका असर तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल
होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया भर में निर्यात होने वाले तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
इस कारण इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है। इसलिए क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना कई देशों के लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों की स्थिति
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर ताजा जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में इस क्षेत्र में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज संचालित हो रहे हैं। इन जहाजों पर कुल 668 भारतीय नाविक तैनात हैं।
इसके अलावा तीन अन्य जहाजों पर 76 भारतीय नाविक अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में मौजूद हैं। इनकी स्थिति पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।
मंत्रालय के अनुसार डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, संबंधित एजेंसियों और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। चौबीस घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम के माध्यम से अब तक हजारों कॉल और ईमेल का जवाब दिया जा चुका है। इसके अलावा 223 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की गई है।



