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InfrastructureProject – ग्रेट निकोबार परियोजना को एनजीटी की मंजूरी

InfrastructureProject – राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल समेत बहुचर्चित अवसंरचना परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी बरकरार रखने का निर्णय दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि परियोजना को दी गई स्वीकृति में आवश्यक पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय शामिल हैं और इस स्तर पर हस्तक्षेप की कोई ठोस वजह नहीं बनती। कोलकाता स्थित पूर्वी जोनल बेंच ने यह आदेश जारी करते हुए कहा कि संबंधित प्राधिकरणों द्वारा तय शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

पर्यावरणीय स्वीकृति पर एनजीटी का दृष्टिकोण

अधिकरण की पीठ, जिसकी अध्यक्षता चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव कर रहे थे, ने अपने आदेश में कहा कि परियोजना के लिए निर्धारित शर्तें व्यापक अध्ययन के बाद तय की गई हैं। अदालत ने यह भी माना कि पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए मंजूरी दी गई है। सुनवाई के दौरान उठाए गए आपत्तियों की समीक्षा के बाद पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मौजूदा स्वीकृति प्रक्रिया में गंभीर कानूनी खामी नजर नहीं आती।

ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित परियोजना का दायरा

यह परियोजना केवल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ अन्य सहायक ढांचागत विकास भी प्रस्तावित हैं। सरकार का तर्क है कि इस पहल से समुद्री व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और भारत को क्षेत्रीय लॉजिस्टिक हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। ग्रेट निकोबार की सामरिक स्थिति को देखते हुए इसे आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। हालांकि, द्वीप की भौगोलिक और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के कारण यह परियोजना शुरुआत से ही चर्चा में रही है।

पर्यावरणीय चिंताओं पर क्या कहा गया

सुनवाई के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी पर संभावित असर को लेकर सवाल उठाए गए थे। अधिकरण ने माना कि ऐसे बड़े विकास कार्यों में संतुलन बनाना जरूरी है। आदेश में कहा गया कि संबंधित एजेंसियां परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान पर्यावरण प्रबंधन योजना का सख्ती से पालन करें। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण और तटीय पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए निगरानी तंत्र को सक्रिय रखने की बात दोहराई गई।

विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों का उल्लेख

अधिकरण ने अपने निर्णय में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की भूमिका का भी जिक्र किया। समिति ने विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद कुछ शर्तों के साथ पर्यावरणीय मंजूरी की अनुशंसा की थी। अदालत ने कहा कि जब विशेषज्ञ निकाय ने वैज्ञानिक तथ्यों और अध्ययन के आधार पर राय दी है, तो उसे बिना ठोस कारण के खारिज करना उचित नहीं होगा। इससे यह संकेत मिलता है कि न्यायिक समीक्षा के दौरान तकनीकी आकलन को महत्व दिया गया।

स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर संभावित प्रभाव

परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों और पर्यावरण समूहों की चिंताएं भी सामने आई थीं। कुछ संगठनों ने आशंका जताई थी कि बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियों से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, समर्थकों का कहना है कि इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा। एनजीटी के आदेश के बाद अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि तय शर्तों का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाता है।

आगे की प्रक्रिया और निगरानी

अधिकरण ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़े सभी विभाग पर्यावरणीय नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करें। यदि भविष्य में किसी शर्त का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्राधिकरण कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होंगे। इस निर्णय के साथ फिलहाल परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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