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Kishtwar Terrorist Encounter: किश्तवाड़ के खूंखार जंगलों में सेना का महामुकाबला, आतंकियों की खैर नहीं…

Kishtwar Terrorist Encounter: जम्मू-कश्मीर का किश्तवाड़ जिला एक बार फिर गोलियों की गूंज और बारूद की गंध से दहल उठा है। सोमवार की पहली किरण के साथ ही सुरक्षाबलों ने उन आतंकियों की तलाश में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जिन्होंने रविवार को कायराना हमला किया था। इस समय (Counter Terrorism Operations) के तहत पूरे इलाके को लोहे की घेराबंदी में तब्दील कर दिया गया है ताकि एक भी गुनहगार बचकर निकल न सके।

Kishtwar Terrorist Encounter
Kishtwar Terrorist Encounter

रात के सन्नाटे और पहाड़ियों की चुनौती

रविवार की रात भारतीय सेना के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थी, क्योंकि अंधेरा इतना गहरा था कि हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहा था। दुर्गम पहाड़ियों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण (Kishtwar Terrorist Encounter) को देखते हुए अभियान को कुछ घंटों के लिए थामना पड़ा था। अधिकारियों ने सामरिक सूझबूझ दिखाते हुए घेराबंदी तो जारी रखी, लेकिन जवानों की सुरक्षा के मद्देनजर सीधा हमला सुबह के लिए टाल दिया।

अचानक हुआ हमला और जवानों का अदम्य साहस

यह पूरा खूनी खेल रविवार को छात्रू क्षेत्र के सुदूरवर्ती सोनार गांव में शुरू हुआ, जहां छिपे हुए आतंकियों ने सुरक्षाबलों को देखते ही उन पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस अचानक हुए विस्फोट में (Injured Indian Soldiers) की संख्या आठ तक पहुंच गई है, जिन्हें छर्रे लगने के कारण गंभीर चोटें आई हैं। घायल होने के बावजूद हमारे जवानों ने मोर्चों को नहीं छोड़ा, जो उनके अटूट राष्ट्रप्रेम की गवाही देता है।

आसमान से नजर और जमीन पर कमांडो का कड़ा पहरा

सोमवार तड़के जब फिर से अभियान शुरू हुआ, तो सेना ने अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक बना दिया है। अब केवल पैदल टुकड़ियां ही नहीं, बल्कि (High Tech Surveillance Drones) और खोजी कुत्तों के जरिए आतंकियों के छिपने के ठिकानों का पता लगाया जा रहा है। घना जंगल और ऊंची पहाड़ियां आतंकियों को छिपने में मदद कर रही हैं, लेकिन तकनीक और जांबाजी के आगे उनकी चालें नाकाम होती दिख रही हैं।

जैश के पाले हुए गुर्गों पर कसता शिकंजा

खुफिया इनपुट के आधार पर यह माना जा रहा है कि जंगलों में फंसे हुए दो से तीन आतंकी सीमा पार बैठे अपने आकाओं के इशारे पर नाच रहे हैं। इन आतंकियों का संबंध (Jaish e Mohammed Terrorists) संगठन से बताया जा रहा है, जो अक्सर घने जंगलों का सहारा लेकर छिपने की कोशिश करते हैं। सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इन आतंकियों का खात्मा नहीं हो जाता, तब तक बंदूकें खामोश नहीं होंगी।

क्या है ऑपरेशन त्राशी-I की पूरी कहानी

भारतीय सेना ने इस विशेष आतंकवाद विरोधी अभियान को ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ का कोडनेम दिया है, जो सुनने में जितना साधारण है, हकीकत में उतना ही घातक है। व्हाइट नाइट कॉर्प्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस की (Joint Combat Mission) के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। सोशल मीडिया पर सेना ने अपने जवानों के पेशेवर रवैये और अदम्य शौर्य की सराहना की है, जो हर विपरीत परिस्थिति में देश की ढाल बने हुए हैं।

गणतंत्र दिवस से पहले अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां

देश जब अपने गणतंत्र का उत्सव मनाने की तैयारी कर रहा है, तब दुश्मन सीमाओं पर अशांति फैलाने की फिराक में है। 26 जनवरी को देखते हुए पूरे (Jammu Kashmir Security Alert) को उच्चतम स्तर पर रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। सुरक्षा एजेंसियों को पुख्ता जानकारी मिली है कि पाकिस्तान की धरती से आतंकी हैंडलर्स नए समूहों को घुसपैठ कराने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।

मुश्किल हालात और एयरलिफ्ट का सहारा

घायल जवानों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए सेना ने कोई कसर नहीं छोड़ी है और जरूरत पड़ने पर गंभीर रूप से घायल जवानों को (Emergency Medical Airlift) के जरिए विशेष अस्पतालों में पहुंचाया गया है। दुर्गम इलाका होने के बावजूद हेलीकॉप्टरों की मदद से रसद और सहायता पहुंचाई जा रही है। सेना का प्रत्येक विंग इस समय आपसी तालमेल के साथ किश्तवाड़ के इन जंगलों को आतंकियों से मुक्त कराने में जुटा है।

घाटी में आतंक के खिलाफ निर्णायक जंग

यह मुठभेड़ केवल एक ऑपरेशन नहीं है, बल्कि उन ताकतों को कड़ा संदेश है जो कश्मीर में शांति की बहाली को पचा नहीं पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी (Community Safety Measures) को लेकर जागरूकता फैलाई जा रही है ताकि वे आतंकियों के किसी भी बहकावे में न आएं। सेना का मानना है कि किश्तवाड़ के इन जंगलों में छिपे आतंकियों के खात्मे के साथ ही क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की कमर टूट जाएगी।

भारत की अटूट प्रतिज्ञा और अंतिम प्रहार

जैसे-जैसे दिन ढल रहा है, घेराबंदी और भी मजबूत होती जा रही है और सुरक्षाबलों का घेरा आतंकियों के करीब पहुंच रहा है। (National Defense Strategy) के तहत अब ऐसे अभियानों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है। किश्तवाड़ की जनता और पूरा देश अपने घायल जवानों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है और सेना के उस अंतिम प्रहार का इंतजार कर रहा है जो इन आतंकियों का नामोनिशान मिटा देगा।

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