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India US Pakistan Foreign Policy: ट्रंप और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों पर जयराम रमेश ने किया तीखा प्रहार, बोले- खोखली कूटनीति…

India US Pakistan Foreign Policy: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शनिवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सैन्य युद्धाभ्यास को लेकर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि यह (diplomatic failure of India) का एक ज्वलंत उदाहरण है। रमेश के अनुसार, एक तरफ भारत खुद को विश्व गुरु के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमारे सबसे करीबी सहयोगी माने जाने वाले देश हमारे कट्टर प्रतिद्वंद्वी के साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं।

India US Pakistan Foreign Policy
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इंस्पायर्ड गैम्बिट-2026 और बढ़ता तनाव

पाकिस्तान और अमेरिकी सेनाओं के बीच ‘इंस्पायर्ड गैम्बिट-2026’ नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास ने भारतीय गलियारों में हलचल मचा दी है। इस युद्धाभ्यास के पूरा होने के बाद जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि अमेरिकी केंद्रीय कमान का यह कदम (international military cooperation) के नाम पर भारत की कूटनीति को एक बड़ा झटका है। उन्होंने केंद्र सरकार की आत्मप्रशंसा वाली नीति पर तंज कसते हुए इसे देश के आत्मसम्मान के खिलाफ बताया।

पाकिस्तान को ‘असाधारण सहयोगी’ बताने पर नाराजगी

कांग्रेस सांसद ने अपनी पोस्ट में पुराने बयानों का हवाला देते हुए अमेरिकी रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे अमेरिकी जनरल माइकल कुनिला ने पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक (exceptional strategic ally) करार दिया था। जयराम रमेश का तर्क है कि भारत सरकार जिस अमेरिका पर भरोसा कर रही है, वही देश उस पाकिस्तान की तारीफों के पुल बांध रहा है जो सीधे तौर पर भारत में अशांति फैलाने का जिम्मेदार है।

फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और ट्रंप की दोस्ती

रमेश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के बीच की बढ़ती केमिस्ट्री पर भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने बार-बार फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की प्रशंसा की है, जबकि मुनीर की (provocative military rhetoric) की वजह से ही पहलगाम जैसे क्षेत्रों में आतंकी हमलों की जमीन तैयार हुई थी। कांग्रेस नेता का मानना है कि अमेरिका का यह दोहरा रवैया भारतीय सुरक्षा हितों के लिए भविष्य में बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर और ट्रंप का विवादित हस्तक्षेप

भारत की सैन्य कार्रवाई को लेकर भी जयराम रमेश ने चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि ट्रंप ने खुद स्वीकार किया है कि उन्होंने (military offensive de-escalation) के नाम पर 10 मई 2025 को भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रुकवाने के लिए हस्तक्षेप किया था। रमेश के अनुसार, यह भारत की संप्रभुता और सेना के मनोबल पर बाहरी दबाव का एक ऐसा सच है जिसे सरकार जनता से छिपा रही है।

एक करोड़ लोगों की जान बचाने का ट्रंप कार्ड

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का श्रेय लिया है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें (global peace mediator) की भूमिका निभाने के लिए धन्यवाद दिया था। ट्रंप का कहना है कि उनके हस्तक्षेप की वजह से दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच होने वाली भीषण जंग टल गई और कम से कम एक करोड़ बेगुनाह लोगों की जान बच गई।

शांति समझौतों के बीच भारत की अनदेखी

ट्रंप ने अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि एक साल के भीतर उन्होंने कई महत्वपूर्ण शांति समझौते कराए हैं। उन्होंने गाजा युद्ध समाप्त कराने और मध्य पूर्व में (regional geopolitical stability) कायम करने का दावा किया। हालांकि, जयराम रमेश का मानना है कि ट्रंप के इन दावों के पीछे पाकिस्तान को दी जा रही अनावश्यक तवज्जो भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अपमानजनक है और सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच की रस्साकशी

भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु हथियारों से लैस हैं, जिससे उनकी आपसी जंग वैश्विक तबाही का कारण बन सकती है। ट्रंप ने इसी बिंदु को आधार बनाकर अपनी (nuclear conflict prevention) क्षमताओं का गुणगान किया। लेकिन विपक्ष का सवाल यह है कि अगर अमेरिका भारत का सच्चा दोस्त है, तो वह पाकिस्तान के साथ सैन्य नजदीकियां बढ़ाकर भारत की सीमाओं पर सुरक्षा का संकट क्यों खड़ा कर रहा है?

कूटनीति के मोर्चे पर घिरती केंद्र सरकार

जयराम रमेश के इन हमलों ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र की (foreign relations management) केवल फोटो खिंचवाने और व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित रह गई है, जबकि असलियत में अमेरिका जैसे देश पाकिस्तान को रणनीतिक बढ़ावा दे रहे हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार अपनी ‘झप्पी कूटनीति’ से बाहर आए और देश के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए।

भविष्य की चुनौतियों और भारत का रुख

सरकाघाट से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे पर हो रही चर्चाओं ने विदेश मंत्रालय की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। आने वाले समय में (bilateral security dialogue) के दौरान भारत को अमेरिका के सामने अपनी चिंताओं को मजबूती से रखना होगा। जयराम रमेश के शब्दों में, यदि समय रहते इस दिशा में सुधार नहीं किया गया, तो भारत की वैश्विक छवि को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

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