Numbness – जानें सुबह हाथ-पैर में सुन्नपन हो तो कब जरूरी है डॉक्टर से सलाह…
Numbness – सुबह उठते समय हाथ-पैर में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना कई लोगों के लिए परिचित अनुभव है। अक्सर यह लंबे समय तक एक ही मुद्रा में सोने या किसी नस पर दबाव पड़ने के कारण होता है और कुछ देर बाद अपने आप ठीक भी हो जाता है। लेकिन अगर सुन्नपन बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक शुरू हो जाए, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। चिकित्सकीय भाषा में हाथ-पैर में होने वाली इस तरह की असामान्य संवेदना को पैरेस्थीसिया कहा जाता है।

नस पर दबाव पड़ने से भी हो सकती है झुनझुनी
जब किसी नस पर कुछ समय के लिए दबाव पड़ता है या उस हिस्से में रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है, तो मस्तिष्क तक संवेदनाओं से जुड़े संकेत सामान्य तरीके से नहीं पहुंच पाते। इसका परिणाम हाथ या पैर में सुन्नपन, झुनझुनी या चुभन जैसी अनुभूति के रूप में सामने आ सकता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना, पैर पर पैर रखकर रहना या सोते समय शरीर का वजन किसी हाथ पर पड़ना इसके सामान्य उदाहरण हैं।
ऐसी परिस्थितियों में शरीर की मुद्रा बदलने और नस पर दबाव हटने के बाद रक्त संचार सामान्य होने लगता है। आमतौर पर कुछ मिनटों में संवेदना वापस आ जाती है और किसी विशेष उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, बार-बार होने वाले या लगातार बढ़ते सुन्नपन की वजह जानना जरूरी हो सकता है।
अचानक सुन्नपन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है
सुन्नपन के साथ कुछ अन्य लक्षण दिखाई दें तो स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए। खास तौर पर शरीर के एक हिस्से में अचानक हाथ या पैर सुन्न होना, चेहरे का एक हिस्सा कमजोर पड़ना, बोलने में परेशानी, देखने में बदलाव या चलने और संतुलन बनाने में दिक्कत स्ट्रोक के चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में घरेलू उपचार आजमाने या लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। स्ट्रोक के मामलों में उपचार शुरू होने का समय महत्वपूर्ण होता है। इसी तरह अचानक कमजोरी या संवेदना खत्म होने की स्थिति को भी चिकित्सकीय जांच के बिना सामान्य नहीं मानना चाहिए।
डायबिटीज और विटामिन की कमी भी हो सकती है वजह
हाथ-पैर में लंबे समय तक झुनझुनी या सुन्नपन कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ा हो सकता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों में लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्त शर्करा स्तर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसमें आमतौर पर पैरों और हाथों में जलन, झुनझुनी, दर्द या संवेदना कम होने जैसी शिकायत हो सकती है।
विटामिन बी12 की कमी, थायरॉयड से जुड़ी समस्याएं और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां भी नसों के काम को प्रभावित कर सकती हैं। रीढ़ की हड्डी या नसों पर दबाव पड़ने की स्थिति में भी संबंधित हिस्से में सुन्नपन के साथ दर्द या कमजोरी हो सकती है। इसलिए बार-बार होने वाली समस्या में डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच और रक्त जांच सहित अन्य परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं।
मल्टीपल स्केलेरोसिस में भी दिख सकते हैं ऐसे लक्षण
मल्टीपल स्केलेरोसिस एक तंत्रिका संबंधी ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की नसों की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंचाती है। इसके संभावित लक्षणों में हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी के अलावा मांसपेशियों में कमजोरी, संतुलन बिगड़ना और दृष्टि संबंधी परेशानियां शामिल हो सकती हैं।
कुछ मामलों में लक्षण कुछ समय के लिए दिखाई देकर कम भी हो सकते हैं। इसी वजह से व्यक्ति उन्हें सामान्य समस्या समझकर टाल सकता है। लगातार या बार-बार लौटने वाले लक्षणों की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है, खासकर तब जब उनके साथ कमजोरी, चलने में परेशानी, तेज दर्द या दृष्टि और बोलने में बदलाव जैसे संकेत भी मौजूद हों।