PoK Unrest – पीओके के हालात पर संयुक्त राष्ट्र चिंतित, शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की जांच की मांग
PoK Unrest – पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हाल की हिंसा और सुरक्षा स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उपप्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को अगर कार्रवाई के दौरान नुकसान पहुंचा है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महासचिव संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क के काम का समर्थन करते हैं और उनकी अपीलों को गंभीरता से लिए जाने की उम्मीद है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कार्रवाई को लेकर सवाल
फरहान हक ने शुक्रवार को एक सवाल के जवाब में कहा कि महासचिव मानवाधिकार उच्चायुक्त के काम का समर्थन करते हैं। वह पीओके में हाल की घटनाओं और वहां की सुरक्षा स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के रुख से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे।
हक ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की अनुमति दी जानी चाहिए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा है तो उसके लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वोल्कर तुर्क ने पहले भी जताई थी चिंता
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इससे पहले पीओके में हुई घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत और संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी पर लगाए गए प्रतिबंधों के साथ उसके नेताओं की गिरफ्तारियों की निष्पक्ष तथा गहन जांच की मांग की थी।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, क्षेत्र में बिगड़े हालात के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को लेकर भी चिंता है। इंटरनेट सेवाओं तक पहुंच पर पाबंदियों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के एकत्र होने से जुड़ी रोक का भी उल्लेख किया गया था।
हिंसा में हुई मौतों की जांच की मांग
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में कहा गया था कि क्षेत्र में विधानसभा चुनाव से पहले जून से कई लोगों की मौत हुई। इनमें बड़ी संख्या प्रदर्शनकारियों की बताई गई थी, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात सुरक्षाकर्मी भी मारे गए थे।
वोल्कर तुर्क ने अशांति के दौरान हुई सभी मौतों की तत्काल, व्यापक और निष्पक्ष जांच की अपील की थी। इसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों, दोनों की मौतों की जांच शामिल है। संयुक्त राष्ट्र ने क्षेत्र में तनाव कम करने और सभी पक्षों से संयम बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
JAAC पर प्रतिबंध और विरोध की पृष्ठभूमि
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC को पीओके में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा एक प्रमुख संगठन बताया जाता है। इसमें व्यापारियों, परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों, छात्रों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य वर्गों के लोगों की भागीदारी रही है।
पाकिस्तान ने JAAC पर सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाते हुए आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाया है। संगठन और उसके समर्थकों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच क्षेत्र में तनाव बढ़ा है।
इंटरनेट सुविधा बहाल करने की अपील
संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया है। मानवाधिकार उच्चायुक्त की ओर से स्थानीय लोगों की बुनियादी समस्याओं और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए सार्थक तथा समावेशी राजनीतिक बातचीत शुरू करने की अपील की गई है।
संयुक्त राष्ट्र का जोर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर है। क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में वहां की सुरक्षा और राजनीतिक घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहने की संभावना है।