Ghevar – सावन में कौन-सा घेवर है अपेक्षाकृत बेहतर, जानिए विशेषज्ञों की सलाह
Ghevar – सावन के महीने में घेवर की मांग हर साल बढ़ जाती है। त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों के दौरान सादा, मावा और मलाई घेवर मिठाई की दुकानों पर सबसे अधिक बिकने वाले विकल्पों में शामिल रहते हैं। हालांकि स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग प्रकार के घेवर में इस्तेमाल होने वाली सामग्री उनकी कैलोरी, चीनी और वसा की मात्रा को प्रभावित करती है। इसलिए किसी भी प्रकार का घेवर खाते समय संतुलित मात्रा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

हर प्रकार के घेवर की पोषण संरचना अलग
घेवर तैयार करने में मुख्य रूप से मैदा, घी और चीनी का उपयोग किया जाता है। इसके बाद अलग-अलग वैरायटी के अनुसार मावा, मलाई या रबड़ी जैसी सामग्री मिलाई जाती है। यही अतिरिक्त सामग्री इसकी ऊर्जा और वसा की मात्रा बढ़ा देती है। इसलिए केवल स्वाद के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर भी विकल्प चुनना चाहिए।
सादा घेवर अपेक्षाकृत हल्का विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार, सादा घेवर में मावा या मलाई की अतिरिक्त परत नहीं होती, इसलिए इसकी कैलोरी अन्य दोनों प्रकारों की तुलना में कुछ कम हो सकती है। हालांकि इसमें भी मैदा और चीनी पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहते हैं। यदि कोई व्यक्ति त्योहार के अवसर पर सीमित मात्रा में मिठाई खाना चाहता है, तो सादा घेवर अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जा सकता है। फिर भी इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।
मावा घेवर में बढ़ जाती है कैलोरी
मावा घेवर में खोया मिलाने से इसका स्वाद और बनावट अधिक समृद्ध हो जाती है। इसके साथ ही इसमें वसा और कैलोरी की मात्रा भी बढ़ जाती है। नियमित या अधिक मात्रा में इसका सेवन वजन बढ़ने और शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने का कारण बन सकता है। जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल या मोटापे की समस्या है, उन्हें इसे सीमित मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है।
मलाई घेवर सबसे अधिक भारी माना जाता है
मलाई या रबड़ी से तैयार घेवर स्वाद के मामले में काफी लोकप्रिय होता है, लेकिन पोषण के लिहाज से यह सबसे अधिक कैलोरी वाला विकल्प माना जाता है। इसमें डेयरी उत्पाद, अतिरिक्त चीनी और वसा की मात्रा अधिक होने के कारण यह शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसका बार-बार या अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना बेहतर रहता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से जीवनशैली संबंधी बीमारियां हैं।
किन लोगों को बरतनी चाहिए अतिरिक्त सावधानी
डायबिटीज, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को घेवर खाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इसमें मौजूद अधिक चीनी और मैदा रक्त शर्करा के स्तर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। यदि ऐसी कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो मिठाई खाने से पहले डॉक्टर या डाइट विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा। त्योहार का आनंद लेने के साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और नियंत्रित मात्रा में मिठाई का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।