अंतर्राष्ट्रीय

Surveillance – चीन में विदेशियों की गतिविधियों पर निगरानी को लेकर सामने आए नए दावे

Surveillance – चीन में विदेशी नागरिकों की निगरानी व्यवस्था को लेकर नए दावे सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, किसी विदेशी पर्यटक, कारोबारी या अन्य आगंतुक के चीन पहुंचने के बाद उसकी कई गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इसमें वीजा संबंधी जानकारी, होटल में ठहरने का विवरण, यात्रा, आवाजाही और अन्य गतिविधियों को निगरानी तंत्र के जरिए दर्ज किए जाने की बात कही गई है। दावा है कि इन जानकारियों के आधार पर संबंधित व्यक्ति की डिजिटल प्रोफाइल भी तैयार की जाती है।

सुरक्षा के नाम पर निगरानी व्यवस्था

चीनी प्रशासन लंबे समय से यह कहता रहा है कि आधुनिक निगरानी प्रणाली का उद्देश्य आतंकवाद, अपराध और सुरक्षा संबंधी जोखिमों पर नियंत्रण रखना है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का तर्क है कि इस तरह की व्यापक निगरानी व्यक्तिगत गोपनीयता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस और तकनीकी कंपनियां मिलकर ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं जिनमें Facial Recognition, Robotics और अन्य उन्नत निगरानी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

डेटा सुरक्षा पर विशेषज्ञों की चिंता

Human Rights Watch की एशिया उप-निदेशक माया वांग ने कहा कि कई देश निगरानी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन चीन में नागरिकों और विदेशियों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए पर्याप्त स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था या कानूनी सुरक्षा उपाय सीमित बताए जाते हैं। वहीं, कनाडा स्थित शोध संस्था SecDev Group से जुड़े विशेषज्ञ वाल्टन के अनुसार, जैसे-जैसे नए निगरानी प्लेटफॉर्म तैयार हो रहे हैं, संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग या अनधिकृत पहुंच का जोखिम भी बढ़ सकता है।

डेटा लीक से सामने आया मामला

रिपोर्ट के मुताबिक, इस निगरानी व्यवस्था की जानकारी एक असुरक्षित पुलिस डैशबोर्ड के ऑनलाइन उपलब्ध होने के बाद सामने आई। एम्सटर्डम के साइबर सुरक्षा शोधकर्ता और पत्रकार मार्क होफर ने इंटरनेट पर खोजबीन के दौरान एक ऐसे प्लेटफॉर्म की पहचान की, जिसे Overseas Personnel Dynamic Control Platform बताया गया। दावा किया गया कि इस सिस्टम का उपयोग झांगजियाको शहर में रहने वाले विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था।

सैकड़ों विदेशियों की जानकारी होने का दावा

रिपोर्ट में कहा गया है कि झांगजियाको, जिसने वर्ष 2022 के शीतकालीन ओलंपिक की सह-मेजबानी की थी, वहां इस प्लेटफॉर्म में 700 से अधिक विदेशी नागरिकों से जुड़ी सूचनाएं दर्ज होने का दावा किया गया। हालांकि, इन दावों पर चीनी प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा सुरक्षा, निजता और डिजिटल निगरानी को लेकर बहस लगातार जारी है और यह मामला भी उसी चर्चा का हिस्सा बन गया है।

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