Instructor – सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अनुदेशकों को एरियर और नियमितीकरण की उम्मीद
Instructor- उत्तर प्रदेश के जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत 24 हजार से अधिक अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद राहत की उम्मीद बढ़ गई है। राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका और मामले से जुड़े सभी संशोधन आवेदन खारिज होने के बाद अनुदेशक संगठन फैसले के शीघ्र क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि यदि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होती है, तो हजारों अनुदेशकों को लंबित एरियर का लाभ मिलने के साथ ही नियमितीकरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिका की खारिज
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया आदेश में स्पष्ट किया कि 4 फरवरी 2026 को दिए गए फैसले में पुनर्विचार की कोई आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले से संबंधित लंबित संशोधन और स्थगन से जुड़े सभी आवेदन स्वतः निस्तारित माने जाएंगे।
मानदेय और एरियर को लेकर पहले ही दिए गए थे निर्देश
परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि एक दशक से अधिक समय तक अनुबंध के आधार पर कार्यरत अनुदेशकों को केवल 7,000 रुपये मासिक मानदेय देना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने वर्ष 2017-18 से 17,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने और उस अवधि से देय अंतर राशि का भुगतान करने का निर्देश भी दिया था। संगठन का दावा है कि इससे प्रत्येक पात्र अनुदेशक को लगभग नौ लाख रुपये तक का एरियर मिल सकता है।
नियमितीकरण की मांग फिर हुई तेज
अनुदेशक संगठन का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद अब सरकार को नियमितीकरण और मानदेय से जुड़े निर्देशों को जल्द लागू करना चाहिए। संगठन ने मुख्यमंत्री, बेसिक शिक्षा मंत्री और संबंधित विभाग से आग्रह किया है कि न्यायालय के आदेश के अनुरूप शासनादेश जारी कर लंबित भुगतान और सेवा संबंधी मामलों का समाधान किया जाए। साथ ही भविष्य के लिए स्पष्ट और स्थायी नीति बनाए जाने की भी मांग की गई है।
मानदेय कटौती पर भी जताई थी आपत्ति
संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार, न्यायालय ने अपने पूर्व निर्णय में यह भी माना था कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के मानदेय में की गई कटौती न्यायसंगत नहीं थी। इसी आधार पर बकाया भुगतान सुनिश्चित करने और सेवा शर्तों में पारदर्शिता लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया था। अनुदेशक अब चाहते हैं कि इन निर्देशों का समयबद्ध तरीके से पालन किया जाए।
शासन स्तर पर होगी अगली कार्रवाई
स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विधिक परीक्षण कराया जाएगा। शासन स्तर पर कानूनी परामर्श लेने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। सरकार की ओर से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही संबंधित विभाग आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करेगा।