Protest – सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के फैसले पर दी विस्तृत सफाई
Protest- सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के साथ किसी भी प्रकार के समझौते की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका 26 दिनों का अनिश्चितकालीन अनशन किसी राजनीतिक सहमति के कारण नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा और संभावित तनावपूर्ण स्थिति को टालने के उद्देश्य से समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र से लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने अपना उपवास खत्म करने का निर्णय लिया।

संभावित कार्रवाई की आशंका के चलते लिया फैसला
शुक्रवार देर रात जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि दिल्ली में बन रहे हालात को देखते हुए उन्हें आशंका थी कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में लद्दाख में प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की याद उनके मन में ताजा थी और उन्हें डर था कि कहीं वैसी स्थिति दोबारा न बने। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
समझौते के आरोपों का किया खंडन
सोनम वांगचुक ने कहा कि कुछ लोग उनके फैसले को सरकार से किसी समझौते से जोड़ रहे हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि उद्देश्य किसी तरह की डील करना होता तो 26 दिन तक भूख हड़ताल करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उनके अनुसार, आंदोलन का मकसद छात्रों की समस्याओं को सामने लाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना था, न कि किसी राजनीतिक लाभ की तलाश करना।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर रखी अपनी बात
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि सरकार के साथ हुई बातचीत के दौरान उनका प्राथमिक मुद्दा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी पहली चिंता यह थी कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज न हो और उन पर कानूनी कार्रवाई से बचाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री से जुड़े मुद्दे पर आंदोलन की मांग अपनी जगह बनी हुई है और भविष्य में भी इस पर आवाज उठाई जाती रहेगी।
अस्पताल में व्यवहार को लेकर लगाए आरोप
सोनम वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि 18 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद उनके साथ सामान्य मरीज जैसा व्यवहार नहीं किया गया। उनका कहना था कि उन्हें अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और बाहरी लोगों से मिलने पर भी रोक लगी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि मोबाइल फोन और लैपटॉप तक अपने पास रखने की अनुमति नहीं दी गई। वांगचुक ने यह भी कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट से दूसरे अस्पताल में जाने की अनुमति मिलने के बावजूद उन्हें कई घंटों तक अस्पताल से बाहर नहीं निकलने दिया गया।
लिखित आश्वासन मिलने के बाद टूटा अनशन
वांगचुक के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से तीन प्रमुख बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया गया। इनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने, परीक्षा सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने तथा कथित पेपर लीक से प्रभावित परिवारों के प्रति सकारात्मक रुख अपनाने की बात शामिल थी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में केवल मौखिक आश्वासन दिया जा रहा था, लेकिन उन्होंने लिखित भरोसा मिलने के बाद ही अनशन समाप्त किया।
साथियों की अनुपस्थिति पर जताया अफसोस
वांगचुक ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि अनशन समाप्त करते समय आंदोलन से जुड़े साथी, छात्र और उनका समर्थन करने वाले सांसद भी मौजूद रहें। उन्होंने दावा किया कि उस समय कई लोगों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख हुआ। उन्होंने कहा कि आंदोलन में साथ खड़े लोगों की मौजूदगी उनके लिए महत्वपूर्ण थी और उनकी अनुपस्थिति इस पूरे घटनाक्रम का सबसे पीड़ादायक पक्ष रही।