Health – देश में अधिकांश मौतों का चिकित्सीय कारण अब भी नहीं हो पाता दर्ज…
Health– भारत में मृत्यु के कारणों का व्यवस्थित चिकित्सीय रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया अभी भी कई राज्यों में अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दर्ज कुल मौतों में केवल 23.1 प्रतिशत मामलों में ही डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया गया। इसका अर्थ है कि अधिकांश मामलों में मृत्यु का आधिकारिक चिकित्सीय कारण दर्ज नहीं हो सका, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों की सटीकता प्रभावित होती है।

राज्यों के बीच बड़ा अंतर
रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन में काफी अंतर देखने को मिला। गोवा में दर्ज सभी मौतों का चिकित्सीय प्रमाणन किया गया। इसके अलावा लक्षद्वीप में 98.5 प्रतिशत और पुडुचेरी में 91 प्रतिशत मामलों में डॉक्टरों ने मृत्यु का कारण प्रमाणित किया। दूसरी ओर, महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 44 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 40 प्रतिशत, तमिलनाडु में 38.7 प्रतिशत और तेलंगाना में 38.3 प्रतिशत रहा। वहीं उत्तर प्रदेश में केवल 6.7 प्रतिशत, हरियाणा में 6.4 प्रतिशत और बिहार में मात्र 3.6 प्रतिशत मौतों का ही मेडिकल प्रमाणन दर्ज किया गया।
रिपोर्ट में सामने आए अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
वर्ष 2024 के दौरान देश में कुल 89,38,301 मौतें दर्ज की गईं। चिकित्सीय रूप से प्रमाणित मामलों में 5.1 प्रतिशत मौतें एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की थीं। इनमें से लगभग 66.7 प्रतिशत नवजातों की मृत्यु प्रसव के दौरान या जन्म के तुरंत बाद हुई। रिपोर्ट के अनुसार, प्रमाणित मौतों में 58.6 प्रतिशत पुरुष और 41.4 प्रतिशत महिलाएं थीं। आंकड़ों के मुताबिक प्रत्येक 1,000 पुरुष मृत्यु पर लगभग 706 महिलाओं की मृत्यु दर्ज की गई।
कानून क्या कहता है
जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर संबंधित डॉक्टर के लिए मृत्यु का कारण और उससे जुड़ी बीमारी का विवरण दर्ज करते हुए चिकित्सा मृत्यु प्रमाणपत्र निःशुल्क रजिस्ट्रार को उपलब्ध कराना अनिवार्य है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु अस्पताल से बाहर होती है, लेकिन उसका उपचार किसी पंजीकृत चिकित्सक की निगरानी में चल रहा था, तो उस डॉक्टर के लिए भी मृत्यु के कारण का प्रमाणपत्र जारी करना आवश्यक माना गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को अधिक सटीक और उपयोगी बनाना है।
किन बीमारियों से सबसे अधिक प्रमाणित मौतें
रिपोर्ट बताती है कि चिकित्सीय रूप से प्रमाणित कुल मौतों में 90.4 प्रतिशत मामले नौ प्रमुख रोग समूहों से जुड़े थे। इनमें सबसे अधिक 38.8 प्रतिशत मौतें हृदय और रक्त संचार तंत्र से संबंधित बीमारियों के कारण दर्ज की गईं। इसके बाद 11 प्रतिशत मौतें श्वसन रोगों, 8.3 प्रतिशत संक्रामक और परजीवी रोगों, 5 प्रतिशत कैंसर, 4.4 प्रतिशत किडनी और मूत्र-जननांग संबंधी बीमारियों, 4.3 प्रतिशत पाचन तंत्र के रोगों तथा 4 प्रतिशत चोट या अन्य कारणों से हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि मृत्यु के कारणों का व्यापक और सटीक रिकॉर्ड भविष्य की स्वास्थ्य नीतियां तैयार करने तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए महत्वपूर्ण आधार बनता है।