AviationPolicy – नए नियम से एयरपोर्ट संचालकों के लिए खुल सकता है एयरलाइन शुरू करने का रास्ता
AviationPolicy – केंद्र सरकार देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण नियम में बदलाव पर विचार कर रही है। प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनियों को अपनी स्वयं की एयरलाइन शुरू करने का अवसर मिल सकता है। मौजूदा व्यवस्था के तहत दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करने वाली कंपनियां किसी एयरलाइन में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकतीं। यदि यह नियम बदला जाता है तो विमानन क्षेत्र में नए कारोबारी खिलाड़ियों की एंट्री का रास्ता आसान हो सकता है।

मंत्रालय स्तर पर प्रस्ताव पर चल रही है चर्चा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर रहा है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले कानून मंत्रालय की मंजूरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति आवश्यक होगी। सरकार का मानना है कि घरेलू विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए यह कदम उपयोगी साबित हो सकता है। वर्तमान में घरेलू हवाई यात्रा के बड़े हिस्से पर इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा है, ऐसे में नए ऑपरेटरों के आने से बाजार में संतुलन बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
अदाणी और जीएमआर समूह को मिल सकता है लाभ
प्रस्तावित बदलाव का सबसे अधिक फायदा देश के बड़े एयरपोर्ट संचालकों को मिल सकता है। अदाणी समूह फिलहाल मुंबई सहित सात हवाई अड्डों का संचालन कर रहा है, जबकि जीएमआर समूह दिल्ली एयरपोर्ट समेत कई प्रमुख एयरपोर्ट का प्रबंधन संभाल रहा है। नियमों में संशोधन होने की स्थिति में ये कंपनियां अपनी एयरलाइन सेवा शुरू करने पर विचार कर सकती हैं। इससे विमानन क्षेत्र में नए विकल्प सामने आ सकते हैं और यात्रियों को अधिक प्रतिस्पर्धी सेवाएं मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
प्रतिस्पर्धा के साथ निष्पक्षता भी रहेगी अहम
इस प्रस्ताव को लेकर कुछ विशेषज्ञों ने संभावित चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। आशंका यह है कि यदि कोई कंपनी एयरपोर्ट और एयरलाइन दोनों का संचालन करेगी, तो वह अपनी एयरलाइन को बेहतर स्लॉट, सुविधाएं या परिचालन संबंधी प्राथमिकता दे सकती है। इससे अन्य एयरलाइन कंपनियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही वजह है कि कई देशों में ऐसे मामलों के लिए सख्त नियामकीय व्यवस्था लागू है, ताकि प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष बनी रहे।
वैश्विक अनुभव भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण
दुनिया के कई देशों में एयरपोर्ट और एयरलाइन के संयुक्त स्वामित्व को लेकर अलग-अलग मॉडल अपनाए गए हैं। अमेरिका में इस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं, जबकि यूरोपीय संघ में प्रतिस्पर्धा संबंधी कानून ऐसे मॉडल को सीमित करते हैं। ऐसे अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को देखते हुए भारत में भी यदि नियमों में बदलाव किया जाता है, तो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त नियामकीय प्रावधानों पर भी विचार किया जा सकता है।
तेजी से बढ़ते विमानन बाजार पर सरकार की नजर
बीते कुछ वर्षों में भारतीय विमानन क्षेत्र में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। जेट एयरवेज और गो एयर जैसी कंपनियां परिचालन बंद कर चुकी हैं, जबकि विस्तारा और एयरएशिया इंडिया का टाटा समूह के साथ विलय हो चुका है। वर्तमान में इंडिगो घरेलू बाजार के सबसे बड़े हिस्से पर कब्जा रखती है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश में एयरपोर्ट की संख्या बढ़ाकर 350 तक पहुंचाना है। वहीं, इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुमान के अनुसार वर्ष 2044 तक भारत में करीब 42.5 करोड़ अतिरिक्त हवाई यात्री जुड़ सकते हैं। ऐसे में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नए एयरलाइन ऑपरेटरों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।