राष्ट्रीय

GoldTheft – लग्जरी बस से 2.63 करोड़ के गहने चोरी, सुराग तक पहुंची पुलिस

GoldTheft- कर्नाटक से मुंबई लौट रही एक लग्जरी स्लीपर बस में करीब 2.63 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण चोरी होने के मामले में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। लंबी पड़ताल के बाद जांच टीम आरोपियों तक पहुंचने के काफी करीब पहुंच गई थी, लेकिन अंतिम चरण में हुई एक अप्रत्याशित घटना के कारण संदिग्ध पुलिस के हाथ नहीं लग सके। अब भी मामले की जांच जारी है और पुलिस आरोपियों की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई कर रही है।

मार्केटिंग के लिए ले जाए गए थे सोने के आभूषण

पुलिस के अनुसार, मुंबई के कालबादेवी स्थित एक ज्वेलरी कारोबार से जुड़े दो कर्मचारी 12 जून को व्यापारिक दौरे पर निकले थे। उनके पास करीब दो किलोग्राम सोने के आभूषणों से भरा बैग था, जिसमें विभिन्न डिजाइनों के गहने और संबंधित दस्तावेज रखे गए थे। दोनों कर्मचारियों ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई शहरों में कारोबार से जुड़े ग्राहकों से मुलाकात की और तय कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुंबई लौटने की तैयारी की।

सफर के दौरान हुई चोरी

दोनों कर्मचारी विजापुर से मुंबई आने वाली स्लीपर कोच बस में सवार हुए। यात्रा के दौरान एक बैग में सोने के आभूषण और जरूरी दस्तावेज थे, जबकि दूसरे बैग में केवल कपड़े और निजी सामान रखा गया था। रात में बस विभिन्न स्थानों से होकर आगे बढ़ी और दोनों कर्मचारी कुछ समय बाद सो गए। सुबह जब बस नवी मुंबई के कलंबोली क्षेत्र में रुकी, तब उनकी नींद खुली और उन्होंने देखा कि गहनों वाला बैग गायब है, जबकि दूसरा बैग अपनी जगह पर मौजूद था।

बस को सीधे पुलिस थाने ले जाया गया

घटना का पता चलते ही कर्मचारियों ने बस चालक को सूचना दी और तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क किया। सूचना मिलने के बाद कामोठे पुलिस मौके पर पहुंची और पूरी बस को पुलिस थाने ले जाकर सभी यात्रियों की मौजूदगी में विस्तृत तलाशी ली। हालांकि, काफी खोजबीन के बावजूद चोरी हुआ बैग बरामद नहीं हो सका। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि चोरी उस समय हुई, जब दोनों कर्मचारी गहरी नींद में थे।

CCTV और Fastag से मिला अहम सुराग

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बस के पूरे यात्रा मार्ग के CCTV फुटेज खंगाले। इसी दौरान अधिकारियों की नजर एक स्कॉर्पियो वाहन पर पड़ी, जो काफी दूरी तक बस के पीछे चलता दिखाई दिया। जांच में सामने आया कि वाहन पर लगी नंबर प्लेट फर्जी थी। इसके बाद पुलिस ने वाहन के रंग और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर विभिन्न टोल प्लाजा का रिकॉर्ड खंगाला। एक टोल प्लाजा पर Fastag भुगतान के जरिए वाहन से जुड़ा महत्वपूर्ण सुराग मिला, जिसके आधार पर पुलिस संबंधित व्यक्ति तक पहुंची।

गांव पहुंची पुलिस, लेकिन संदिग्ध फरार

Fastag खाते से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस एक व्यक्ति तक पहुंची, जिसने बताया कि घटना के समय वाहन उसके एक रिश्तेदार के पास था। इसके बाद नवी मुंबई पुलिस की बड़ी टीम संबंधित गांव पहुंची और संदिग्धों को पकड़ने की योजना बनाई। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही पुलिस गांव में दाखिल हुई, किसी ने पटाखा फोड़ दिया। आवाज सुनते ही संदिग्ध सतर्क हो गए और मौके से फरार होने में सफल रहे। इस कारण गिरफ्तारी की पूरी कार्रवाई अंतिम समय में विफल हो गई।

आरोपियों की तलाश अब भी जारी

पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं और जांच लगातार आगे बढ़ रही है। चोरी में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए विभिन्न राज्यों में समन्वय के साथ कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का विश्वास है कि तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर आरोपियों तक जल्द पहुंचा जा सकेगा।

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