Espionage – ब्रह्मोस इंजीनियर मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा याचिका पर सुनवाई
Espionage– ब्रह्मोस एयरोस्पेस से जुड़े इंजीनियर निशांत अग्रवाल के कथित जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। यह याचिका उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की ओर से दायर की गई है, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत अग्रवाल को शासकीय गोपनीयता अधिनियम से जुड़े आरोपों से राहत दी गई थी। शीर्ष अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित कर दी है।

हाईकोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती
यूपी एटीएस ने अपनी याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है, जिसमें निशांत अग्रवाल को जासूसी के आरोपों से बरी किया गया था। एजेंसी का कहना है कि इस मामले से जुड़े कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विस्तृत समीक्षा की जानी चाहिए। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए आगे की सुनवाई का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका पर विस्तृत सुनवाई की जाएगी। इसके साथ ही अगली सुनवाई की तारीख 31 अगस्त तय की गई है, जब दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखेंगे।
पहले मिल चुकी है जमानत
निशांत अग्रवाल को इस मामले में वर्ष 2023 के दौरान जमानत मिल चुकी थी। इसके बाद संबंधित न्यायिक आदेशों को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। इसी क्रम में विभिन्न अदालतों में मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर सुनवाई होती रही, जिसके बाद अब यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंचा है।
नागपुर अदालत ने सुनाई थी सजा
इस मामले में 3 जून 2024 को नागपुर की एक जिला अदालत ने निशांत अग्रवाल को कथित रूप से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा और जुर्माना लगाया था। इसके बाद उच्च न्यायालय में दायर अपीलों के दौरान मामले में कानूनी स्थिति बदली और अब सर्वोच्च न्यायालय इस पूरे विवाद के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करेगा।
जांच और सुनवाई का बदला था स्थान
मामले की शुरुआती जांच उत्तर प्रदेश एटीएस ने की थी और प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया लखनऊ में चली। बाद में जांच से जुड़े तथ्यों और कथित अपराध के स्थान को देखते हुए मामले को नागपुर स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद वहीं की अदालत में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई और फैसला सुनाया गया।
अगली सुनवाई पर रहेगी नजर
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है। अदालत के समक्ष यूपी एटीएस और अन्य संबंधित पक्ष अपने कानूनी तर्क प्रस्तुत करेंगे। फिलहाल शीर्ष अदालत ने केवल नोटिस जारी किया है और मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।