Inflation – सरकार ने PPI लागू करने की दिशा में बढ़ाया बड़ा कदम
Inflation- भारत में महंगाई के आकलन की प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत हो गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 15 जून को पहली बार उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़े जारी किए हैं। इसके साथ ही थोक मूल्य सूचकांक (WPI) को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार ने इस बदलाव को लागू करने के लिए पांच वर्ष का संक्रमण काल तय किया है, ताकि उद्योग, सरकारी संस्थाएं और अन्य संबंधित पक्ष नई व्यवस्था के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। माना जा रहा है कि इससे आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ भारत की तुलना अधिक सटीक हो सकेगी।

WPI और PPI में क्या है मूल अंतर
अब तक WPI के जरिए थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापा जाता था। इसके विपरीत PPI किसी उत्पाद के फैक्ट्री से निकलने के समय उत्पादक को मिलने वाली वास्तविक कीमत को दर्शाता है। इसमें थोक स्तर के मार्जिन और कर शामिल नहीं होते। उदाहरण के तौर पर, किसी उत्पाद की फैक्ट्री से निकलते समय मिलने वाली कीमत PPI मानी जाएगी, जबकि थोक बाजार में पहुंचने के बाद उसकी कीमत WPI के दायरे में आती है। वहीं उपभोक्ता द्वारा खुदरा बाजार में चुकाई गई कीमत Consumer Price Index (CPI) से संबंधित होती है।
सरकार ने क्यों चुना नया मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा WPI प्रणाली उत्पादकों को मिलने वाली वास्तविक कीमतों का पूरा चित्र प्रस्तुत नहीं करती। इसके अलावा इसमें सेवा क्षेत्र शामिल नहीं था, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवाओं की हिस्सेदारी आधे से अधिक है। नई PPI व्यवस्था इस कमी को दूर करेगी और महंगाई के आकलन को अधिक व्यापक बनाएगी। यह प्रणाली उन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भी है, जिन्हें कई विकसित देशों ने पहले ही अपनाया हुआ है।
नई व्यवस्था में शामिल होंगे तीन प्रमुख सूचकांक
मंत्रालय के अनुसार, PPI प्रणाली को तीन हिस्सों में विकसित किया गया है। पहला Output PPI (OPPI), जो तैयार उत्पादों के लिए उत्पादकों को मिलने वाली कीमतों को मापेगा। दूसरा Input PPI (IPPI), जिसके माध्यम से उत्पादन में उपयोग होने वाले कच्चे माल की लागत का आकलन किया जाएगा। फिलहाल इसका उपयोग परीक्षण के तौर पर विनिर्माण क्षेत्र में किया जा रहा है। तीसरा Service PPI (SPPI) है, जिसमें बैंकिंग, बीमा, प्रतिभूति सेवाएं, पेंशन फंड, रेलवे, हवाई यात्री परिवहन और दूरसंचार सहित सात प्रमुख सेवा क्षेत्रों की कीमतों का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है और इसमें शामिल वस्तुओं की संख्या भी 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है।
उद्योग और व्यावसायिक अनुबंधों पर पड़ेगा असर
देश के अनेक औद्योगिक और व्यावसायिक अनुबंधों में मूल्य संशोधन और लागत निर्धारण के लिए अब तक WPI को आधार बनाया जाता रहा है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने के दौरान कंपनियों को अपने अनुबंधों और मूल्य निर्धारण की शर्तों की समीक्षा करनी होगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उद्योग जगत को संक्रमण अवधि समाप्त होने की प्रतीक्षा करने के बजाय अभी से अपने एस्केलेशन क्लॉज और अन्य व्यावसायिक प्रावधानों का पुनर्मूल्यांकन शुरू कर देना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की व्यावहारिक कठिनाई न आए।
आर्थिक आंकड़ों और नीति निर्माण में बढ़ेगी सटीकता
विशेषज्ञों के अनुसार, PPI केवल महंगाई मापने का नया पैमाना नहीं होगा, बल्कि औद्योगिक उत्पादन और वास्तविक GDP के आकलन में भी इसकी भूमिका बढ़ेगी। इससे फैक्ट्री स्तर की कीमतों का अधिक सटीक डेटा उपलब्ध होगा, जिससे आर्थिक नीतियों को तैयार करने में मदद मिलेगी। हालांकि शुरुआती वर्षों में WPI और PPI के बीच अंतर को समझने तथा पुराने अनुबंधों को नई प्रणाली के अनुरूप ढालने जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसके बावजूद इस बदलाव को भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।