CourtCase – अभियोजन निदेशक नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब
CourtCase- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अभियोजन निदेशक के पद पर एक पुलिस अधिकारी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से इस पद से जुड़े नियमों और नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर यह स्पष्ट करे कि अभियोजन निदेशक की नियुक्ति के लिए वर्तमान में कौन-से नियम लागू हैं और किन आधारों पर नियुक्तियां की जा रही हैं।

नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे कानूनी सवाल
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अदालत ने पहले भी राज्य सरकार से इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, लेकिन अब तक कोई विस्तृत जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर न्यायालय ने दोबारा सरकार से निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है।
याचिका में क्या कहा गया
याचिकाकर्ता केशर सिंह चौहान ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उत्तराखंड के गठन के बाद से अब तक अभियोजन निदेशक के पद पर लगातार पुलिस अधिकारियों की ही नियुक्ति होती रही है। उनके अनुसार यह व्यवस्था भारतीय न्याय संहिता की धारा 20 में दिए गए प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि इस पद पर नियुक्ति करते समय कानून में निर्धारित पात्रता का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
पात्रता संबंधी प्रावधानों का हवाला
याचिका में कहा गया है कि संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार अभियोजन निदेशक के पद पर सेवानिवृत्त सत्र न्यायाधीश अथवा कम से कम 15 वर्ष का वकालत अनुभव रखने वाले अधिवक्ता को नियुक्त किया जा सकता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि इन मानकों के स्थान पर पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है, तो यह न केवल वैधानिक प्रावधानों बल्कि सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व टिप्पणियों की भावना से भी मेल नहीं खाता।
स्वतंत्र अभियोजन व्यवस्था का मुद्दा
सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा गया कि जांच एजेंसियों और अभियोजन तंत्र को स्वतंत्र बनाए रखने का उद्देश्य निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। याचिका के अनुसार यदि अभियोजन विभाग का नेतृत्व पुलिस पृष्ठभूमि वाला अधिकारी करता है, तो उसकी स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। इसी आधार पर अदालत से अनुरोध किया गया है कि भविष्य में केवल वही व्यक्ति इस पद पर नियुक्त किए जाएं जो कानून में निर्धारित योग्यता पूरी करते हों।
सरकार के जवाब पर टिकी अगली सुनवाई
फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने राज्य सरकार से नियुक्ति संबंधी नियम, प्रक्रिया और कानूनी आधार स्पष्ट करने को कहा है। अब इस मामले में सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी, जिसके आधार पर अदालत अगला निर्णय ले सकती है।