FireSafety – अलीगंज अग्निकांड पर दायर जनहित याचिका की आज होगी सुनवाई
FireSafety – लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में 22 जून को हुए अग्निकांड से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ 2 जुलाई को सुनवाई करेगी। याचिका में घटना की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने के साथ न्यायालय की निगरानी में एक समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। मामले को न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

स्वतंत्र जांच की मांग उठी
जनहित याचिका में आग लगने की घटना की परिस्थितियों और उससे जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र समिति गठित की जानी चाहिए। याचिका में समयबद्ध जांच पूरी करने पर भी जोर दिया गया है।
कई सरकारी विभाग बनाए गए पक्षकार
याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के अलावा कई संबंधित विभागों और अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा के महानिदेशक, लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी, नगर आयुक्त, लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, जिलाधिकारी तथा अन्य संबंधित प्राधिकरण शामिल हैं। याचिकाकर्ता का उद्देश्य घटना से जुड़े सभी प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा कराना बताया गया है।
अधिवक्ता ने दाखिल की जनहित याचिका
मुख्य स्थायी अधिवक्ता कार्यालय के अनुसार यह जनहित याचिका स्थानीय अधिवक्ता शिवेंदु पांडेय की ओर से दायर की गई है। उन्होंने घटना की जांच और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को न्यायालय के समक्ष उठाया है। राज्य सरकार की ओर से भी याचिका की सूचना संबंधित कार्यालयों को भेज दी गई है ताकि सुनवाई के दौरान आवश्यक पक्ष रखा जा सके।
हाईकोर्ट में होगी प्रारंभिक सुनवाई
बुधवार को निर्धारित सुनवाई के दौरान अदालत याचिका में उठाए गए बिंदुओं और संबंधित पक्षों की प्रारंभिक दलीलों पर विचार कर सकती है। इसके बाद न्यायालय आगे की कार्यवाही और आवश्यक निर्देशों पर निर्णय लेगा। फिलहाल अदालत की ओर से इस मामले में कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया गया है।
मामले पर रहेगी आगे की नजर
अलीगंज अग्निकांड से जुड़े इस मामले पर अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों और संबंधित विभागों के जवाब के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। सुनवाई के बाद यदि न्यायालय आवश्यक समझता है, तो जांच प्रक्रिया या प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर आगे के निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।